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जाति व्यवस्था का इतिहास: क्या अंग्रेजों ने जाति बनाई?
अंग्रेज़ों ने जाति को बदला, बनाया नहीं। रिकॉर्ड ये रहा 👇
जाति व्यवस्था का इतिहास पुराना सवाल है, और इसका कोई एक सर्वमान्य जवाब नहीं है। पर “अंग्रेज़ों ने जाति बनाई” वाला दावा जाँचना आसान है। ईस्ट इंडिया कंपनी के आने से सदियों पहले विदेशी यात्रियों ने जाति के नियम दर्ज किए थे (BAWS Vol 5, ch. 16)। फिर भी गंभीर विद्वान कहते हैं कि औपनिवेशिक राज ने जाति को एक आधिकारिक सिस्टम में सख़्त कर दिया (Project MUSE review of Dirks)। तो चल, दोनों हिस्से अलग-अलग देखते हैं।
सबसे मज़बूत रूप पहले सुन, और ये विद्वानों से आता है, सोशल मीडिया से नहीं। निकोलस डर्क्स Castes of Mind (2001) में लिखते हैं कि ब्रिटिश उपनिवेशवाद ने जाति को वो बना दिया जो वो आज है (मूल अंग्रेज़ी: “made caste what it is today”) (Project MUSE review)। उसी review के मुताबिक वो ये नहीं कहते कि जाति अंग्रेज़ों की रचना थी (Project MUSE review)। प्रकाशक का सार जोड़ता है कि ब्रिटिश राज में जाति एक ऐसा शब्द बन गई जो भारत की अलग-अलग सामाजिक पहचानों को ढँकने लगा (Princeton UP summary, via the 1947 Partition Archive)।
इस तर्क की बुनियाद बर्नार्ड कोहन का जनगणना पर काम है। The Wire के मुताबिक कोहन ने दिखाया कि जनगणना ने जाति (jati) को दर्ज करके कोड में बाँधा, और ये प्रक्रिया ब्रिटिश राज की खासियत थी क्योंकि ये नौकरशाही औज़ार नया था (The Wire)। 1901 की जनगणना में हर्बर्ट रिस्ले ने जाति को सामाजिक वरीयता और नस्ल पर आधारित क्रम की तरह वर्गीकृत किया (UCLA South Asia)। कोहन ने इसे रिस्ले की अपनी थ्योरी चलाने की ज़िद कहा (मूल अंग्रेज़ी: “theoretical axe to grind”) (UCLA South Asia)।
तो विद्वानों का दावा छोटा है: औपनिवेशिक जनगणना और नृविज्ञान ने जाति को सख़्त किया और नए सिरे से क्रम में बिठाया। मिथ इसे खींचकर “अंग्रेज़ों ने जाति बनाई” कर देता है। The Wire इस खींचे हुए रूप को “अंग्रेज़ों का ज़हरीला तोहफ़ा” कहता है (मूल अंग्रेज़ी: “a poisoned gift of the British”) (The Wire)।
भारत में जाति की उत्पत्ति: अंग्रेज़ों से पहले के सबूत
बाबासाहेब तीन विदेशी पर्यवेक्षकों का हवाला देते हैं, जिन्होंने हिंदू समाज की अजीब बनावट दर्ज की (BAWS Vol 5, ch. 16, pp. 145–156)। मेगस्थनीज़ ने लगभग 305 ईसा पूर्व में समाज को सात वर्गों में बँटा देखा, जहाँ अपने वर्ग के बाहर शादी और पेशा बदलना मना था (BAWS Vol 5, ch. 16, pp. 145–147)। अल्बरूनी ने लगभग 1030 में लिखा कि शुरू से ही सिर्फ़ चार जातियाँ थीं (मूल अंग्रेज़ी: “from the very beginning only four”) (BAWS Vol 5, ch. 16, p. 147)।
अल्बरूनी ने चार जातियों के बाहर के समूह भी दर्ज किए, जैसे हादी, डोम और चांडाल, जो गंदे कहे जाने वाले काम करते थे और बहिष्कृत माने जाते थे (BAWS Vol 5, ch. 16, pp. 147–148)। फिर 1500 से 1517 के बीच पुर्तगाली अफ़सर दुआर्ते बारबोसा ने मालाबार की अठारह जातियाँ गिनाईं, जो एक-दूसरे को छू नहीं सकती थीं और आपस में शादी नहीं कर सकती थीं (BAWS Vol 5, ch. 16, pp. 155–156)। ये बाहर वालों के बयान हैं, और बाबासाहेब ख़ुद चेताते हैं कि विदेशी जाति की पूरी तस्वीर नहीं दे सकते थे (BAWS Vol 5, ch. 16, p. 156)।
बाबासाहेब की अपनी समझ ग़ौर करने लायक है। उन्होंने लिखा कि जाति बढ़ती और बदलती संस्था रही है, और मेगस्थनीज़, अल्बरूनी और पुर्तगालियों ने हर बार उसका अलग रूप देखा (BAWS Vol 5, ch. 16, p. 156)। इससे एक सधा हुआ नतीजा निकलता है: जाति बदली, पर मौजूद थी।
जाति व्यवस्था का इतिहास, अंग्रेज़ी राज में: क्या बदला
पहला, जनगणना ने जाति गिनने का तरीका बदला। डेंज़िल इबेटसन ने जातियों को पेशे के हिसाब से क्रम में रखने की वकालत की, और 1891 की जनगणना ने इसे अपनाया (UCLA South Asia)। फिर 1901 में नया सिद्धांत आया: “सामाजिक वरीयता के हिसाब से वर्गीकरण, जैसा देशी जनमत मानता है” (मूल अंग्रेज़ी: “Classification by Social precedence as recognised by native public opinion”) (BAWS Vol 5, “Untouchables: Their Numbers”)। रिस्ले की नस्ल वाली थ्योरी के साथ मिलकर इसने जाति की सीढ़ी पर सरकारी मुहर लगा दी (UCLA South Asia)।
दूसरा, कानून ने कुछ जाति-जुड़े पदों को क़ानून में लिख दिया। 1874 के Bombay Hereditary Offices Act ने “वंशानुगत पद” परिभाषित किया और महारों को ऐसे गाँव अधिकारियों में गिना (Mandloi, p. 110)। फिर भी Mandloi के मुताबिक अंग्रेज़ी राज में वतनदारों को ऐसे कोई विशेषाधिकार नहीं मिले जो उनके पास पहले से न हों (Mandloi, p. 104)। यानी Act ने पुराने पद को दर्ज किया, नया पद नहीं गढ़ा।
तीसरा, सरकार ने अपनी नीति में जाति की रेखाएँ इस्तेमाल कीं। बाबासाहेब ने लिखा कि महार अफ़सरों ने 1892 के उन आदेशों के खिलाफ़ अर्ज़ी दी, जिनसे महारों की भर्ती बंद हुई (BAWS Vol 1, Ranade, Gandhi and Jinnah)। ज़्यादा जानना हो तो हमारा महार जाति इतिहास देख। अंग्रेज़ों के बाद जाति की गिनती का क्या हुआ, इसके लिए हमारी caste census पोस्ट (English) पढ़।
मतलब अंग्रेज़ों ने जाति को गिना, क्रम में रखा और सरकारी ताक़त से लागू किया। ये “सख़्त करना” है, “बनाना” नहीं।
जाति व्यवस्था अंग्रेजों ने बनाई: दावा बनाम रिकॉर्ड
“अंग्रेजों ने जाति बनाई” वाला दावा सोर्स के सामने ऐसे छँटता है।
दावा
रिकॉर्ड
फ़ैसला
अंग्रेज़ों ने जाति गढ़ी
मेगस्थनीज़, अल्बरूनी और बारबोसा ने 1757 से पहले जाति के नियम दर्ज किए; पेशवा राज्य भी जाति के मामलों में शामिल था
मिथ
जनगणना ने जाति को आधिकारिक खानों में सख़्त किया
रिस्ले का 1901 का “सामाजिक वरीयता” क्रम; कोहन और डर्क्स
विद्वानों से समर्थित
ब्रिटिश कानून ने जाति-जुड़े पदों को क़ानून में लिखा
1874 का Hereditary Offices Act, पुराने वतन पदों पर आधारित
कोडिंग के तौर पर पक्का
अंग्रेज़ों से पहले जाति ढीली और लचीली थी
अल्बरूनी खाने के नियम और बहिष्कृत समूह दर्ज करते हैं; बाबासाहेब कहते हैं जाति समय के साथ रूप बदलती रही
विवादित
“अंग्रेज़ों ने जाति बनाई” वाला मिथ बार-बार क्यों लौटता है
ये एक आरामदायक कहानी है। The Wire का एक essay तर्क देता है कि सारा दोष उपनिवेशवाद पर डालने से आज जाति से फ़ायदा उठाने वाले अपनी ज़िम्मेदारी से बच निकलते हैं (The Wire)। उसी essay के मुताबिक उपनिवेशवाद का जाति पर असर पेचीदा था, और निचली जातियों पर उसकी चोट ख़ास तौर पर भारी थी (The Wire)।
मिथ एक असली विद्वत् तर्क के छोटे हो जाने से भी बनता है। विद्वानों ने कहा कि उपनिवेशवाद ने जाति को सख़्त किया, और एक लाइन के वर्शन में “सख़्त” शब्द गिर गया (Project MUSE review)। सुन, यहाँ receipts मायने रखते हैं, और पन्ना नंबर नारे से भारी पड़ता है। (यही आदत Ambedkarite Educational Program सिखाता है: Blogging & SEO, Website Building और Google AI।)
निचोड़
जाति व्यवस्था का इतिहास अंग्रेज़ों से पुराना है, और लगभग 1030 तक जाति के नियम दर्ज मिलते हैं (BAWS Vol 5, ch. 16)। ब्रिटिश जनगणना और कानूनों ने जाति को सख़्त किया और क्रम में बिठाया (UCLA South Asia; Mandloi, p. 110)। दोनों बातें सच हैं, इसलिए किसी भी तरफ़ वाले को इन्हें एक में मत सपाट करने दे।
बाबासाहेब ने तीन शब्द दिए: Educate. Agitate. Organize.
पढ़ना “Educate” है। Agitate और Organize तब शुरू होते हैं जब तू screenshot नहीं, सोर्स वाला पेज शेयर करता है।
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क्या अंग्रेज़ों ने जाति व्यवस्था बनाई? नहीं। विदेशी पर्यवेक्षकों ने अंग्रेज़ी राज से बहुत पहले जाति के नियम दर्ज किए, और डर्क्स जैसे विद्वानों का तर्क है कि अंग्रेज़ों ने जाति को सख़्त किया, गढ़ा नहीं (BAWS Vol 5, ch. 16; Project MUSE review)।
भारत में जाति की उत्पत्ति क्या है? इसका कोई एक सर्वमान्य जवाब नहीं है। मेगस्थनीज़ और अल्बरूनी के सबसे पुराने बाहरी बयान भी जाति के नियम बताते हैं (BAWS Vol 5, ch. 16, pp. 145–148)।
1901 की जनगणना ने जाति के साथ क्या किया? उसने जातियों को “सामाजिक वरीयता” के हिसाब से क्रम में रखा, और रिस्ले ने इस क्रम को नस्ल की थ्योरी से जोड़ा (BAWS Vol 5, “Untouchables: Their Numbers”; UCLA South Asia)।
अंग्रेज़ों से पहले जाति के बारे में किसने लिखा? लगभग 305 ईसा पूर्व मेगस्थनीज़ ने, लगभग 1030 में अल्बरूनी ने और 1500–1517 में दुआर्ते बारबोसा ने, जैसा बाबासाहेब ने हवाला दिया (BAWS Vol 5, ch. 16)।
निकोलस डर्क्स और बर्नार्ड कोहन कौन हैं? ये इतिहासकार और नृविज्ञानी हैं जिनके काम का तर्क है कि औपनिवेशिक जनगणना और नृविज्ञान ने आधुनिक जाति को आकार दिया (Project MUSE review; The Wire)।