Poster-style graphic: peshwa history, 1713 to 1818, with the list of Peshwas and the caste debate | पेशवा का इतिहास 1713 से 1818: पेशवाओं की सूची और जाति की बहस पर नेवी-ब्लू पोस्टर स्टाइल ग्राफिक
पेशवा का इतिहास सुनाने वाले ज़्यादातर लोग बुनियादी बातें छोड़ देते हैं। ये पेज वही भरता है 👇
पेशवा का इतिहास लगभग 1713 से 1818 तक चलता है, और दोनों तरफ़ वाले इस पर मिथ फैलाते हैं (Encyclopedia of India, “Peshwai and Pentarchy”)। यहाँ पहले पेशवाओं की सूची, timeline और वंश-वृक्ष है। फिर जाति, कोरेगांव और अंग्रेज़ी राज के दावे तीन खानों में छँटते हैं: पक्के, विवादित और मिथ।
पेशवा का इतिहास एक शब्द से शुरू होता है: पेशवा का मतलब क्या है?
पेशवा मराठों में मुख्य मंत्री का पद था, जिसे मुख्य प्रधान भी कहते थे (Britannica, “Peshwa”)। शुरू में ये शिवाजी की सलाहकार परिषद का मुखिया होता था (Britannica, “Peshwa”)। शिवाजी के बाद पद की हैसियत घट गई, फिर शाहू ने 1714 में बालाजी विश्वनाथ भट, एक चितपावन ब्राह्मण, को पेशवा बनाया (Britannica, “Peshwa”)।
फिर मुख्य मंत्री ही असल शासक बन गया। बाजीराव प्रथम ने पद को वंशानुगत करवा लिया (Britannica, “Peshwa”)। 1749 में शाहू की मृत्यु के बाद बालाजी बाजीराव महाराष्ट्र के असल शासक रहे (Britannica, “Peshwa”)। पेशवा वंश ने पुणे से लगभग एक सदी राज किया, इसीलिए “पेशवा का पुणे” शहर भी है और एक दौर का नाम भी (Encyclopedia of India, “Peshwai and Pentarchy”)।
पेशवा काल की timeline, 1713 से 1818
पेशवा का इतिहास एक तालिका में देख। पहली तारीख़ पर सोर्स अलग-अलग हैं, इसलिए दोनों दिखाई हैं।
तारीख़
घटना
सोर्स
1713 या 1714
शाहू के अधीन बालाजी विश्वनाथ पेशवा बने (1713 Encyclopedia of India में, 1714 Britannica में)
Encyclopedia of India; Britannica
1719
बालाजी दिल्ली पर चढ़ाई करते हैं और चौथाई व सरदेशमुखी के हक़ पाते हैं
Encyclopedia of India
1720
बाजीराव प्रथम पेशवा बने; 1734 में मालवा लिया गया
Encyclopedia of India
1740
बालाजी बाजीराव (नानासाहेब) पेशवा बने
Encyclopedia of India
1749
शाहू की मृत्यु; नानासाहेब असल शासक
Britannica
1756
नानासाहेब आंग्रे की नौसेना नष्ट करने के लिए कंपनी की मदद लेते हैं
Encyclopedia of India
14 जनवरी 1761
पानीपत की तीसरी लड़ाई; मराठों ने एक लाख से ज़्यादा लोग खोए
Encyclopedia of India
1761 से 1772
माधवराव प्रथम मराठा सत्ता फिर जमाते हैं
Encyclopedia of India
1772 से 1773
नारायणराव की हत्या; रघुनाथराव का दावा जज रामशास्त्री प्रभुणे ने अवैध ठहराया
Encyclopedia of India
1774 से 1795
सवाई माधवराव; बारभाई परिषद; 1782 में सालबाई की संधि
Encyclopedia of India
1802
बाजीराव द्वितीय बसीन की संधि करते हैं
Britannica; Encyclopedia of India
1 जनवरी 1818
कोरेगांव की लड़ाई
Bombay Presidency Gazetteer
1818
अंग्रेज़ों पर हमले के बाद बाजीराव द्वितीय पद से हटाए गए
Britannica
पेशवाओं की सूची
क्रम से पेशवाओं की सूची ये रही। शासन के साल Encyclopedia of India से हैं (Encyclopedia of India, “Peshwai and Pentarchy”)।
पेशवा
शासन
किस लिए जाने जाते हैं
बालाजी विश्वनाथ
1713–1720
वंश के संस्थापक; 1719 में दिल्ली
बाजीराव प्रथम
1720–1740
वंशानुगत उत्तराधिकार; 1734 में मालवा
बालाजी बाजीराव (नानासाहेब)
1740–1761
पुणे का प्रशासन; पानीपत
माधवराव प्रथम
1761–1772
पानीपत के बाद वापसी
नारायणराव
1772–1773
हत्या
सवाई माधवराव
1774–1795
बारभाई परिषद
बाजीराव द्वितीय
1795–1818
बसीन की संधि; पद से हटाया जाना
नारायणराव के बाद रघुनाथराव ने पेशवा पद का दावा किया। जज रामशास्त्री प्रभुणे ने उस दावे को अवैध ठहराया (Encyclopedia of India, “Peshwai and Pentarchy”)।
पेशवा वंश का वंश-वृक्ष
इस्तेमाल हुई entry जिन रिश्तों को पक्का करती है, सिर्फ़ वही यहाँ हैं।
बालाजी विश्वनाथ
बाजीराव प्रथम (बड़े बेटे)
बालाजी बाजीराव (नानासाहेब), जिनके दो भाई थे: रघुनाथराव और जनार्दन
विश्वासराव (पानीपत में मारे गए) और माधवराव प्रथम (दूसरे बेटे)
रघुनाथराव
बाजीराव द्वितीय
नारायणराव (हत्या), जिनके मरणोपरांत जन्मे बेटे सवाई माधवराव थे
(Encyclopedia of India, “Peshwai and Pentarchy”)। Entry में नारायणराव के पिता का नाम नहीं है, इसलिए उन्हें वृक्ष में नहीं रखा।
आख़िरी पेशवा कौन थे?
आख़िरी पेशवा बाजीराव द्वितीय थे (Britannica, “Peshwa”)। होलकरों से हारने के बाद उन्होंने 1802 में बसीन की संधि करके अंग्रेज़ों की सुरक्षा ली (Britannica, “Peshwa”)। अंग्रेज़ों पर हमले के बाद उन्हें 1818 में पद से हटाया गया, और 1853 में उनकी मृत्यु हुई (Britannica, “Peshwa”)।
कंपनी ने उन्हें बिठूर भेज दिया। उनके गोद लिए बेटे नानासाहेब को गवर्नर-जनरल डलहौज़ी ने मान्यता नहीं दी, और आगे चलकर वो 1857 के विद्रोह के बड़े नेता बने (Encyclopedia of India, “Peshwai and Pentarchy”)।
पेशवा का इतिहास और जाति: रिकॉर्ड क्या कहता है
भट परिवार के पेशवा चितपावन ब्राह्मण थे (Britannica, “Peshwa”)। ये पेज उस दौर की राज्य-नीति की बात करता है, आज के किसी समुदाय पर इल्ज़ाम नहीं लगाता।
एक reference पेशवा शासन को revenue, सेवाओं और अदालतों में सुधार का श्रेय देता है (Encyclopedia of India, “Peshwai and Pentarchy”)। उसी राज्य ने जाति के मामलों में भी हिस्सा लिया (Fukazawa, 1968)। “अंग्रेज़ों ने बर्बाद किया” वाली लाइन 1756 और 1802 में पेशवा राज्य के अपने सौदे भी छोड़ देती है (Encyclopedia of India, “Peshwai and Pentarchy”)।
1 जनवरी 1818 को कंपनी की एक टुकड़ी ने कोरेगांव में बाजीराव द्वितीय की सेना का सामना किया। औपनिवेशिक gazetteer ने गिनती दी: 800 ब्रिटिश सैनिक बनाम 30,000 मराठे (Bombay Presidency Gazetteer, Poona, “Koregaon”)। बाकी सोर्स अलग आँकड़े देते हैं, इसलिए कोई भी संख्या सोर्स के नाम के साथ ही लिख।
स्तंभ पर 49 नाम हैं, और आनंद तेलतुंबड़े के हिसाब से उनमें 22 महार हैं (The Wire, 2018)। इतिहासकार शैलजा कुंभोजकर के मुताबिक महारों के पास एक कठोर शासन के खिलाफ़ कंपनी से मिलने के सिवा कोई चारा नहीं था, और बाद में उन्होंने इस स्मारक को अपना बना लिया (Kumbhojkar, EPW 2012)। 1 जनवरी 1927 को बाबासाहेब ने स्मारक पर एक सभा की (Columbia University timeline)।
बलुता पद्धति अंग्रेज़ी राज से पुरानी है (Mandloi, Vidyasagar University Journal of History, 2019–20, p. 104)। महार वतन वंशानुगत पद और ज़मीन का अनुदान था (Mandloi, p. 104)। बाबासाहेब ने 1928 में इसे बदलने के लिए Bill No. XII पेश किया (Mandloi, p. 110)। Bombay Inferior Village Watans Abolition Act (Act 1 of 1959) की धारा 4 ने आख़िर inferior watans खत्म किए (Act 1 of 1959, s. 4)।
भिडे वाडा और फुले: क्या वो अंग्रेज़ों के एजेंट थे?
फुले ने शारीरिक गुलामी खत्म करने के लिए अंग्रेज़ों का शुक्रिया किया, पर शिक्षा नीति पर सरकार को घेरा भी (Gulamgiri, Govt of Maharashtra 1991, pp. 29, 30)। 1880 में पुणे नगर पालिका के 32 सदस्यों में अकेले उन्होंने लॉर्ड लिटन के सम्मान के खिलाफ़ वोट दिया (Gulamgiri, Govt of Maharashtra 1991, p. 16)। भारत सरकार के मुताबिक फुले दंपति का स्कूल भिडे वाडा में 1 जनवरी 1848 को खुला, जबकि महाराष्ट्र सरकार के संस्करण में अगस्त 1848 लिखा है (Ministry of I&B on X, 2023; Gulamgiri, p. 13)।
इस गाइड के दावे ऐसे छँटते हैं। ऐसे पेज तभी काम के हैं जब हर दावे के साथ पन्ना नंबर हो। (यही आदत Ambedkarite Educational Program सिखाता है: Blogging & SEO, Website Building और Google AI।)
दावा
फ़ैसला
सोर्स
पेशवा राज्य जाति के मामलों में शामिल था
पक्का
Fukazawa, 1968
अछूतों के लिए सड़क की रोक और काला धागा
बाबासाहेब की गवाही के तौर पर पक्का; कोई पेशवा-आदेश नहीं मिला
BAWS Vol 1
मटका और झाड़ू के नियम
विवादित
BAWS Vol 1; Gulamgiri, p. 29
पेशवा राज सबके लिए स्वर्ण युग था
मिथ
Encyclopedia of India; Fukazawa, 1968
अकेले अंग्रेज़ों ने पेशवाओं को बर्बाद किया
मिथ
Encyclopedia of India
महार वतन सम्मान का काम था, गुलामी नहीं
मिथ
Mandloi, 2019–20
फुले अंग्रेज़ों के एजेंट थे
मिथ
Gulamgiri, Govt of Maharashtra 1991
कोरेगांव में “500 महारों ने 28,000 को हराया”
मिथ
Bombay Presidency Gazetteer
कोरेगांव का मतलब (जाति-विरोधी या औपनिवेशिक युद्ध)
विवादित
Kumbhojkar, 2012; Teltumbde, 2018
निचोड़
पेशवा का इतिहास न स्वर्ण युग है, न सिर्फ़ अँधेरी कहानी। ये एक ऐसा राज्य था जिसका प्रशासन असली था, जाति-नीति असली थी, और कंपनी से सौदे भी असली थे (Encyclopedia of India; Fukazawa, 1968)। कुछ भी शेयर करने से पहले हर दावे को उसके पन्ना नंबर से मिला ले।
बाबासाहेब ने तीन शब्द दिए: Educate. Agitate. Organize.
पढ़ना “Educate” है। Agitate और Organize तब शुरू होते हैं जब तू screenshot नहीं, सोर्स वाला पेज शेयर करता है।
आज X account ban हो रहे हैं। Reels पर shadow-ban। WhatsApp groups report हो रहे हैं। तो Bahujans को अपने खुद के platforms चाहिए: emails, blogs, websites, AI tools।
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पेशवा का मतलब क्या है? पेशवा मराठों में मुख्य मंत्री का पद था, जिसे मुख्य प्रधान भी कहते थे (Britannica, “Peshwa”)।
पहले पेशवा कौन थे? वंश की शुरुआत बालाजी विश्वनाथ से हुई। Encyclopedia of India उनका शासन 1713–1720 बताती है, और Britannica के मुताबिक उन्हें 1714 में नियुक्त किया गया (Encyclopedia of India; Britannica)।
आख़िरी पेशवा कौन थे? बाजीराव द्वितीय, जिन्हें 1818 में पद से हटाया गया और जिनकी मृत्यु 1853 में हुई (Britannica, “Peshwa”)।
पेशवाओं की राजधानी कहाँ थी? पुणे लगभग एक सदी, 1713–1818, तक पेशवा सत्ता का केंद्र रहा (Encyclopedia of India, “Peshwai and Pentarchy”)।
क्या पेशवा ब्राह्मण थे? भट परिवार के पेशवा चितपावन ब्राह्मण थे (Britannica, “Peshwa”)।
आगे पढ़ने के लिए (Encyclopedia of India की bibliography में, इस पेज के लिए पढ़ी नहीं): B. G. Gokhale, Poona in the Eighteenth Century (OUP, 1988); V. T. Gune, The Judicial System of the Marathas (1953)
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