पंजाब के दलित समुदाय में रविदासिया उन लोगों को कहा जाता है जो गुरु रविदास को अपना गुरु मानते हैं। समुदाय के अधिकांश सदस्य दलित धर्म का पालन करते हैं (Drishti IAS, “Ravidasias in Punjab”)। 24 मई 2009 को समुदाय के सदस्यों में से एक, संत रामानंद, वियना के एक गुरु रविदास गुरुद्वारे में हुए हमले के दौरान मारे गए (The Tribune, 2010)। 2010 में डेरा सचखंड बल्लां ने एक अलग धर्म, रविदासिया, की घोषणा की (The Tribune, 2026)। अब समुदाय के सदस्य जनगणना 2027 में स्वयं को एक अलग धर्म के अंतर्गत गिने जाने की इच्छा रखते हैं (The Tribune, 2026)।
यह एक जटिल घटना है, जिसमें धर्म, जाति, जनगणना और आरक्षण की बदलती प्रकृति जैसे विभिन्न तत्व शामिल हैं। इस समुदाय के सदस्य विदेशों में बसे हुए हैं और वे नियमित रूप से भारत में धन-प्रेषण करते हैं। यह लेख विभिन्न तर्कों का सार प्रस्तुत करता है और, यदि उपलब्ध हो, तो आंकड़े भी प्रस्तुत करता है। समाजशास्त्री रोंकी राम भी इसे एक विकसित होती प्रक्रिया मानते हैं, जिसमें दलितों की पहचान शामिल है (Ronki Ram, Journal of Punjab Studies, vol. 16 no. 1)।
रविदासिया कौन हैं?
सामान्यतः पंजाब में रविदासिया समुदाय के सदस्य चमार समुदाय से संबंधित होते हैं। समुदाय के सदस्य चमड़े से संबंधित कार्यों में लगे होते हैं (Outlook, 2021)। इस समुदाय के सदस्य अनुसूचित जातियों (SC) में आते हैं। अनुसूचित जातियों के बारे में अधिक जानने के लिए कृपया अनुसूचित जातियों की सूची पर हमारा लेख पढ़ें।
Census 2011 में पंजाब की तस्वीर
भारत की जनगणना (2011) में पंजाब के लिए चमारों, रामदासियों, रविदासियों और अन्य सिखों के नामों को एक साथ शामिल किया गया है (तालिका A-10)। रविदासियों को चमार सिख और रामदासिया भी कहा जाता है (Outlook, 2021)। आदि धर्म से संबंधित लोगों को अलग से दर्ज किया गया है (Census of India, 2011, Table A-10, Punjab)।
रिपोर्ट के अनुसार, 2011 में पंजाब में अनुसूचित जातियों (SC) की कुल संख्या लगभग 8.86 मिलियन थी, जो आबादी का लगभग 31.9% थी (The Tribune, 2026)। उसी रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 1.017 मिलियन लोग आदि धर्म के अनुयायी थे और लगभग 2.078 मिलियन लोग रविदासिया समुदाय के सदस्य थे (The Tribune, 2026)। Drishti IAS के अनुसार, पंजाब के दोआबा क्षेत्र में आदि धर्म समुदाय के लगभग 1.2 मिलियन सदस्य रहते हैं (Drishti IAS)।
डेरा क्या होता है?
‘डेरा’ एक संत द्वारा स्थापित सामाजिक और धार्मिक केंद्र होता है। पंजाब में कई ‘डेरे’ हैं। इनमें से डेरा सचखंड बल्लां रविदासिया समुदाय का सबसे प्रसिद्ध डेरा है (ThePrint)।
गुरु रविदास कौन थे?
संत और कवि गुरु रविदास की रविदासिया समुदाय द्वारा पूजा की जाती है। विभिन्न स्रोतों में उनकी जन्मतिथि अलग-अलग बताई गई है। कुछ स्रोतों का कहना है कि वे 15वीं शताब्दी के कवि थे, जबकि अन्य कहते हैं कि उनका जन्म 1377 में हुआ था। (The Tribune, 2026; The Indian Express, republished on eSamskriti)।
Outlook के लेख के अनुसार, रविदास द्वारा प्रतिपादित सामाजिक समानता और अहिंसा के सिद्धांतों ने उन्हें ऐसे समाज की कल्पना करने के लिए प्रेरित किया, जहाँ कोई पीड़ा और कष्ट न हो। बाद में इसे बेगमपुर कहा गया। रविदास ने ऐसे समाज की कल्पना की जहाँ कोई सामाजिक अन्याय या शोषण न हो। Outlook के लेख के शब्दों में, पंजाब का नया दलित मध्यम वर्ग उन्हें अपना गुरु और सामाजिक-धार्मिक दर्शन मानता है।
रविदास के चालीस भजन सिख धर्मग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब में शामिल हैं (Outlook, 2026)। इस संबंध के कारण सिख और रविदासी परंपराएँ कई शताब्दियों तक परस्पर जुड़ी रहीं। हम इस दस्तावेज़ के बाद के भागों में अध्ययन करेंगे कि यह संबंध कहाँ और कब समाप्त हुआ तथा कहाँ और कब जारी रहा।
1931 की जनगणना और आदि धर्म आंदोलन
रविदासिया आस्था की यह परंपरा आदि धर्म आंदोलन से अपनी शुरुआत का पता लगाती है, जो 1920 के दशक में सक्रिय था। इस आंदोलन की स्थापना गदर पार्टी के पूर्व सदस्य मंगू राम ने की थी। इस आंदोलन का उद्देश्य आर्य आक्रमणकारियों के विरुद्ध आदि धर्म (देश के लोगों के मूल धर्म से संबंधित) के हितों की रक्षा करना था। इसे व्यापक लोकप्रियता भी मिली और 1931 की जनगणना में पंजाब के लगभग 4 लाख लोगों ने अपने धर्म को आदि धर्म घोषित किया।
ब्रिटिश सरकार ने आदि धर्मियों को एक अलग धार्मिक और सामाजिक समूह के रूप में वर्गीकृत किया (The Tribune, 2026)। हालांकि, 1931 की जनगणना से आदि धर्म को जातिगत आंकड़ों में शामिल किया गया था (Bochkovskaya, Studia Religiosa Rossica, 2023)। Outlook के अनुसार, एस.एस. जौधका और आदि धर्म समुदाय के बीच तनाव के कारण जौधका ने यह व्याख्या की कि आरक्षण की आवश्यकता ने आदि धर्म समुदाय को स्वयं को हिंदू मानने के लिए मजबूर किया (2021)।
आदि धर्म और बी.आर. आंबेडकर के बारे में
आदि धर्म कई संगठनों में विभाजित था और 1940 तथा 1950 के दशक तक इसके अधिकांश नेता या तो कांग्रेस में या अनुसूचित जाति महासंघ में विलय हो गए (Outlook, 2021)। Outlook के अनुसार, आदि धर्मी आंबेडकर का सम्मान करते हैं। पंजाब के मंगू राम ने गांधी के आमरण अनशन का विरोध किया और अपना स्वयं का अनशन शुरू किया (2021)। हमने अलग निर्वाचन क्षेत्रों के तर्क पर अपने लेख में इसे विस्तार से शामिल किया है।
आंबेडकर का अपना रास्ता
बी.आर. आंबेडकर ने 14 अक्टूबर 1956 को बौद्ध धर्म अपना लिया (Outlook Traveller, 2024)। यूके सरकार के एक शोध-सार के अनुसार, आदि धर्म और रविदासी आंदोलन एक ही जाति समूह पर केंद्रित थे (Religions and Development Research Programme, Policy Brief No. 8)। नवयान बौद्ध धर्म पर हमारा लेख भी इसी पर केंद्रित है।
डेरा बल्लां के बाहर आंबेडकर
डेरा बल्लां के बाहर गुरु रविदास के साथ आंबेडकर के चित्र बेचे जाते हैं। (Outlook, 2021) पास के फिल्लौर स्थित एक डेरे के रविदासी दावा करते हैं कि बाबा ब्रह्म दास 1947 में आंबेडकर से मिले थे (Outlook, 2021)। यह दावा डेरे द्वारा किया गया है और इस दावे के समर्थन में कोई साहित्यिक प्रमाण नहीं मिला है (Outlook, 2021)।
डेरा सचखंड बल्लां क्या है?
डेरा सचखंड बल्लां जालंधर से 8 किलोमीटर दूर बल्लां गांव में स्थित है (Outlook, 2021)। इसकी शुरुआत 20वीं शताब्दी के आरंभ में बाबा संत पीपल दास ने की थी (Outlook, 2021)। ThePrint इसे पंजाब का सबसे बड़ा रविदासिया डेरा बताता है (ThePrint)। हर वर्ष हजारों श्रद्धालु इस डेरे से वाराणसी के लिए विशेष ट्रेनों से रवाना होते हैं (The Print)।
वाराणसी, राजनीति और विदेश से आया पैसा
द ट्रिब्यून के अनुसार, डेरा ने 1970 के दशक में वाराणसी में गुरु रविदास जन्मस्थान मंदिर का निर्माण शुरू किया था (द ट्रिब्यून, 2026)। द प्रिंट के अनुसार, डेरा का विकास रविदासियों के सामाजिक विकास का संकेत है (द प्रिंट)। उसी रिपोर्ट के अनुसार, डेरा का पंजाब विधानसभा की दोआबा क्षेत्र से लगभग 19 से 20 सीटों पर प्रभाव है (द प्रिंट)। आउटलुक के अनुसार, विदेश गए रविदासियों की आर्थिक प्रेषण राशि के कारण देश के अलग-अलग हिस्सों में, खासकर पंजाब में, कई डेरों की स्थापना हुई (आउटलुक, 2021)।
2009 की वियना हमले और 2010 की घोषणा
24 मई 2009 को, छह सशस्त्र व्यक्तियों ने वियना में गुरु रविदास गुरुद्वारा में एकत्र हुई संगत पर हमला किया (द प्रिंट)। संत निरंजान दास गंभीर रूप से घायल हुए और संत रामानंद की मृत्यु हो गई (द ट्रिब्यून, 2010)।
अदालत का फ़ैसला
सितंबर 2010 में, वियना की एक अदालत ने एक भारतीय सिख को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उसके चार सहयोगियों को भी आजीवन कारावास की सजा दी गई, जबकि पांचवें सहयोगी को 18 वर्षों के कारावास की सजा सुनाई गई (द ट्रिब्यून, 2010)। कुछ लोगों के अपराधों के लिए सिख समुदाय को जिम्मेदार ठहराना अनुचित होगा।
Punjab में हिंसा भड़क उठी। Jalandhar में Jammu Tawi Express के 19 डिब्बे जलाए गए (The Tribune, “13 years after riots over Vienna attack”). उस दौर के 75 FIR में से ज़्यादातर बाद में “untraced” बंद हुए या सरकारी दख़ल के बाद ख़त्म कर दिए गए (The Tribune, “13 years after riots over Vienna attack”). एक मामले में अदालत ने सात लोगों को पाँच साल की सज़ा दी (The Tribune, “13 years after riots over Vienna attack”).
2010 में Guru Ravidas की जयंती पर Varanasi में Dera के sants ने रविदासिया को नया धर्म घोषित किया (The Tribune, 2026). Dera ने अपना ग्रंथ Amritbani अपनाया। The Tribune के अनुसार यह किताब 2012 में औपचारिक रूप से जारी हुई (The Tribune, 2026). Outlook के मुताबिक Dera में Guru Granth Sahib की जगह अब यही ग्रंथ रखा जाता है, और इसमें 200 पद बताए जाते हैं (Outlook, 2021; Outlook, 2026).
Ronki Ram लिखते हैं कि Punjab के दलितों ने Vienna हमले को अपनी अलग पहचान पर हमले की तरह देखा (Ronki Ram, Journal of Punjab Studies, vol. 16 no. 1).
रविदासिया और सिख धर्म
Guru Ravidas के 40 पद Guru Granth Sahib में हैं, इसलिए कई रविदासिया ख़ुद को Sikh भी मानते हैं (Outlook, 2026). Census की SC सूची में “Ravidasia Sikh” और “Ramdasia Sikh” नाम इसी जुड़ाव का निशान हैं (Census of India 2011, Table A-10, Punjab). 2010 से पहले Dera Ballan में भी Guru Granth Sahib रखा जाता था (Outlook, 2021). बदलाव उसके बाद आया।
लेकिन सब रविदासिया एक राय नहीं रखते। The Tribune का सवाल है कि क्या Dera Ballan सभी रविदासियों की नुमाइंदगी करता है। उसके अनुसार कुछ deras और संगठन Dera Ballan के रास्ते को नहीं मानते, और Charan Chhoh Ganga जैसे कुछ लोग “Ravidassia” शब्द से सहमत नहीं हैं (The Tribune, 2026). Tribune यह भी लिखता है कि Balmiki जैसे दूसरे दलित समूहों ने Dera के Guru Ravidas का नाम अपनी पहचान में जोड़ने पर आपत्ति जताई थी (The Tribune, 2026).
The Wire के मुताबिक Jalandhar के Jandu Singha गाँव में अब दो Ravidass gurdwara हैं, क्योंकि लोग Guru Granth Sahib और Amritbani पर बँट गए (The Wire). यानी बहस गाँव तक पहुँच चुकी है। सिख पक्ष की चिंता भी दर्ज करनी चाहिए। एक Sikh policy-लेख इसे Sikh समुदाय की सामूहिक ताक़त घटने की तरह देखता है, पर यह advocacy की श्रेणी का लेख है (Sarbloh Institute, 2026).
इस बहस की जड़ में जाति भी है। The Tribune का विश्लेषण कहता है कि Punjab समाज में जाति के टिके रहने से Dera Ballan के मिले-जुले ढाँचे पर दबाव पड़ा (The Tribune, 2026). Ambedkarite नज़र से सवाल सिर्फ़ ग्रंथ का नहीं, बराबरी का है। Dera Ballan के एक श्रद्धालु ने Outlook से कहा कि वहाँ सबको बराबर सम्मान मिलता है (Outlook, 2021; हमारा अनुवाद).
Census 2027 की माँग और SC Order का सवाल
12 जुलाई 2026 को Phagwara में हज़ारों लोग जुटे। उन्होंने Census 2027 में “Ravidassia” के लिए अलग धर्म का column माँगा (The Tribune, 2026). Dera Ballan के Sant Niranjan Das सम्मेलन में मुख्य अतिथि थे (The Tribune, Jalandhar). वक्ताओं का तर्क था कि यह समानता और धार्मिक स्वतंत्रता के संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप होगा (The Tribune, Jalandhar). अभी Census में Ravidassia के लिए अलग विकल्प नहीं है (Outlook, 2026).
एक क़ानूनी पेच है। Constitution (Scheduled Castes) Order, 1950 की Para 3 कहती है कि Hindu, Sikh या Buddhist के अलावा कोई धर्म मानने वाला SC का सदस्य नहीं माना जाएगा (Ministry of Social Justice, SC Order 1950, Para 3). शुरू में सिर्फ़ Hindu का ज़िक्र था। Sikh 1956 में और Buddhist 1990 में जोड़े गए (Sabrang India). अगर अलग “Ravidassia धर्म” दर्ज होता है, तो SC सूची और आरक्षण पर क्या असर होगा? हमें सरकार या Registrar General का कोई साफ़ बयान नहीं मिला।
समुदाय का पक्ष The Wire में छपा है। उसमें एक बयान के अनुसार “Ad-Dharmi” जाति है और “Ravidassia” धर्म (The Wire). यह उनका बयान है, हमारा निष्कर्ष नहीं। दूसरी तरफ़ Jodhka जैसे विश्लेषक पहले ही कह चुके हैं कि अलग धार्मिक पहचान आरक्षण को जोखिम में डाल सकती थी (Outlook, 2021).
Ambedkar के बाद के इतिहास में भी यही बहस दिखती है। Buddhist बने दलित 1990 तक SC सूची से बाहर रहे (Sabrang India). इसलिए “अलग धर्म बनाम आरक्षण” का सवाल सिर्फ़ रविदासिया का नहीं है। यह उन सभी दलित समुदायों का सवाल है जो धर्म बदलते हैं या नया धर्म घोषित करते हैं। भारत में आरक्षण की व्यवस्था इसी सूची पर टिकी है (Constitution (Scheduled Castes) Order, 1950).
UK और विदेश में रविदासिया
UK के Office for National Statistics (ONS) ने Ravidassia को अलग group के रूप में गिना। England and Wales में 2011 में 11,200 लोगों ने ख़ुद को Ravidassia बताया (ONS, Small populations, Census 2021). 2021 में यह संख्या 9,700 (0.02%) रही; 8,200 ने इसे सिर्फ़ अपना धर्म लिखा (ONS, Small populations, Census 2021). 2011 में समुदाय ने अपने लोगों को Ravidassian लिखने के लिए प्रोत्साहित किया था, ताकि सटीक गिनती मिले (ONS, 2011 Census benefits page).
UK में caste पर क़ानून अलग सवाल है। Equality Act 2010 की s.9(5) में caste को race का हिस्सा बनाने का प्रावधान था। जुलाई 2018 में सरकार ने उसे हटाने और case law पर भरोसा करने का फ़ैसला किया (Oxford Human Rights Hub, 2018; Government Equalities Office, 23 जुलाई 2018). इसमें Tirkey v Chandhok (EAT, 2014) अहम केस माना गया (Oxford Human Rights Hub, 2018). पूरी तस्वीर के लिए ब्रिटेन का क़ानूनी हाल वाला हमारा लेख देखें।
Outlook के अनुसार 1990 के दशक में पश्चिम गए Ravidasi प्रवासियों ने पैसा कमाया और “निम्न जाति” का दर्जा मानने से इनकार किया (Outlook, 2021). Mark Juergensmeyer के हवाले से Outlook लिखता है कि Britain में कुछ Chamar प्रवासी Jat Sikhs जितना या उनसे ज़्यादा कमाते हैं (Outlook, 2021). Outlook इसी आर्थिक आत्मविश्वास और दान को deras के विस्तार से जोड़ता है, और Vienna हिंसा को उसी पृष्ठभूमि में रखता है (Outlook, 2021).
Ambedkarite नज़रिया: हम इससे क्या समझें?
तीन बातें दर्ज करने लायक़ हैं। पहली, यह पहचान जाति के अनुभव और 1931 की Ad Dharm परंपरा से निकली है (The Tribune, 2026). दूसरी, Dera Ballan पूरे समुदाय की एकमात्र आवाज़ नहीं है (The Tribune, 2026). तीसरी, धर्म की पहचान और आरक्षण का सवाल अब भी सुलझा नहीं है (Ministry of Social Justice, SC Order 1950, Para 3). Ambedkar का नवयान आंदोलन एक जाति-समूह तक सीमित नहीं था (Religions and Development Research Programme, Policy Brief 8).
Census 2027 में पहचान की जो बहस चल रही है, उसमें अक्सर वही कहानी चलती है जो बड़े अख़बार और channels चलाते हैं। Bahujan समुदायों को अपनी बात दर्ज करने के लिए अपने platforms चाहिए। Ambedkarite Educational Program (AEP) blogging, website बनाना, email marketing, AI tools और Google AI सिखाता है। इसकी एक बार की फीस ₹297 है, lifetime access के साथ, और यह सरकारी funding से नहीं चलता: https://ambedkarite.in/courses/ambedkarite-educational-program/ । मुफ़्त रास्ता Movement से जुड़ना है: https://ambedkarite.in/movement/ ।
निष्कर्ष
रविदासिया पहचान जाति के अनुभव से निकली है, किसी एक घटना से नहीं। Ad Dharm से Dera Ballan तक हर दौर में सवाल एक ही रहा: बराबरी कहाँ मिलेगी? आज यह सवाल Census 2027 और SC Order की Para 3 के बीच अटका है (Ministry of Social Justice, SC Order 1950, Para 3). अंतिम फ़ैसला अभी नहीं हुआ, और हमें 29 अक्टूबर 2026 तक सरकार का कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
रविदासिया कौन हैं?
रविदासिया Guru Ravidas को गुरु मानने वाला समुदाय है। इसके ज़्यादातर लोग Punjab के दलित समुदाय से आते हैं, खासकर Doaba क्षेत्र से (Drishti IAS; Outlook, 2021). Census 2011 में Punjab में Ad Dharmi करीब 10.17 लाख और रविदासिया समुदाय करीब 20.78 लाख गिने गए (The Tribune, 2026).
क्या रविदासिया और सिख एक ही हैं?
इसका एक जवाब नहीं है। Guru Granth Sahib में Ravidas के 40 पद हैं और कई रविदासिया ख़ुद को Sikh मानते हैं (Outlook, 2026). Dera Sachkhand Ballan ने 2010 में अलग धर्म घोषित किया, पर कुछ deras और संगठन उसके रास्ते से सहमत नहीं हैं (The Tribune, 2026).
रविदासिया को अलग धर्म घोषित कब और किसने किया?
Dera Sachkhand Ballan और उसके sants ने 2010 में Guru Ravidas की जयंती पर Varanasi में यह घोषणा की (The Tribune, 2026). इससे पहले 2009 में Vienna में Sant Ramanand की मौत हुई थी (The Tribune, 2010).
क्या Census 2027 में रविदासिया का अलग column मिलेगा?
अभी तय नहीं है। समुदाय ने 12 जुलाई 2026 को Phagwara में यह माँग रखी (The Tribune, 2026). हमें 29 अक्टूबर 2026 तक सरकार या Registrar General का कोई आधिकारिक फ़ैसला नहीं मिला।
Ad-Dharmi और रविदासिया में क्या फ़र्क़ है?
Ad Dharm 1920 के दशक का आंदोलन था, जिसे 1931 की जनगणना में अलग समुदाय के रूप में दर्ज किया गया (The Tribune, 2026). रविदासिया पहचान को 2010 में Dera Ballan ने अलग धर्म के रूप में आगे रखा (The Tribune, 2026). Census 2011 में Ad Dharmi को SC की अलग entry मिली है (Census of India 2011, Table A-10, Punjab).
SOURCES
- The Tribune: https://www.tribuneindia.com/news/comment/census-politics-revives-punjabs-ad-dharm-legacy/ (Census politics revives Punjab’s Ad-Dharm legacy, 22 अगस्त 2026)
- The Tribune: https://www.tribuneindia.com/news/jalandhar/ravidasia-community-seeks-separate-religious-recognition-in-census-2027/ (Phagwara सम्मेलन की रिपोर्ट)
- The Tribune: https://www.tribuneindia.com/2010/20100929/world.htm (Vienna अदालत का फ़ैसला, 29 सितंबर 2010 का अंक)
- The Tribune: https://www.tribuneindia.com/news/jalandhar/13-years-after-riots-over-vienna-attack-7-jailed-469889/amp
- The Tribune: https://www.tribuneindia.com/news/simply-punjab/valmiki-majhbi-sikh-leaders-push-for-population-proportionate-seat-allocation-in-punjab/ (Census 2011 के Punjab आँकड़े)
- Outlook: https://outlookindia.com/opinion/india-news-deras-of-punjab-powerful-symbols-of-dalit-assertion-news-305138 (Deras of Punjab, 2021)
- Outlook: https://www.outlookindia.com/national/why-ravidassias-want-a-separate-religion-in-the-censusand-why-it-matters (2026)
- ThePrint: https://theprint.in/politics/as-modi-meets-sachkhand-ballan-chief-why-punjabs-largest-dalit-dera-matters-politically/2997028/
- Journal of Punjab Studies: https://punjab.global.ucsb.edu/sites/default/files/sitefiles/journals/volume16/no1/1-Ronki%20Ram16.1.pdf (Ronki Ram, vol. 16 no. 1)
- Forward Press: https://www.forwardpress.in/?p=98171
- Studia Religiosa Rossica: https://srr.rsuh.ru/jour/article/download/271/217 (Bochkovskaya, 2023)
- Census of India: https://censusindia.gov.in/nada/index.php/catalog/42915 (Table A-10, Punjab, 2011)
- Ministry of Social Justice: https://socialjustice.gov.in/public/ckeditor/upload/97321692251201.pdf (Constitution (Scheduled Castes) Order, 1950)
- Sabrang India: https://sabrangindia.in/demands-amending-constitution-schedule-castes-order-1950/
- ONS: https://www.ons.gov.uk/peoplepopulationandcommunity/populationandmigration/populationestimates/bulletins/smallpopulationsenglandandwales/census2021
- ONS: https://cy.ons.gov.uk/census/2011census/2011censusbenefits/howothersusecensusdata/thirdsectorandcommunitygroups
- Oxford Human Rights Hub: https://ohrh.law.ox.ac.uk/the-long-and-winding-road-of-caste-legislation-in-the-uk/
- Equally Ours: https://www.equallyours.org.uk/government-equalities-office-consultation-response-and-report-caste-in-great-britain-and-equality-law-a-public-consultation/ (Government Equalities Office response का सार)
- The Wire: https://thewire.in/caste/dera-ballan-sect-head-writes-to-modi-seeks-separate-ravidassia-dalit-identity
- Drishti IAS: https://drishtiias.com/hindi/pdf/1727314829.pdf
- All India Radio: https://www.newsonair.gov.in/wp-content/uploads/2025/02/Bhopal-6.pdf
- eSamskriti (The Indian Express की रिपोर्ट का पुनःप्रकाशन): https://www.esamskriti.com/essays/textfile/11_6797_7898.txt
- Outlook Traveller: https://outlooktraveller.com/experiences/places-of-interest/republic-day-2024-deekshabhoomi-where-ambedkar-embraced-buddhism
- Religions and Development Research Programme (UK): https://assets.publishing.service.gov.uk/media/57a08b00e5274a27b20008cb/PB8.pdf
- Sarbloh Institute: https://sarblohinstitute.substack.com/p/a-panth-divided-the-strategic-security
- Constitution of India, Article 341: मैंने मूल text नहीं खोला। चाहें तो legislative.gov.in का link जोड़ दूँगा।

