रोहित वेमुला केस और कैंपस में जाति: UGC नियम, आँकड़े, अदालत

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रोहित वेमुला केस और कैंपस में जाति: UGC नियम, आँकड़े, अदालत

रोहित वेमुला हैदराबाद विश्वविद्यालय में पीएचडी के छात्र थे, जिनकी 17 जनवरी 2016 को परिसर में मृत्यु हो गई। वे 26 वर्ष के थे। उनकी मृत्यु को आत्महत्या माना गया (विकिपीडिया और द वायर)। 2019 में एक जनहित याचिका (पीआईएल) के बाद, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने जनवरी 2026 में समानता और स्थिति पर नियम जारी किए (लाइव लॉ)।

सर्वोच्च न्यायालय (एससी) ने जनवरी 2026 में इन नियमों पर रोक लगा दी और यूजीसी ने 2012 के नियम बरकरार रखे (एससी ऑब्जर्वर)। वेमुला मामले की जांच के बाद दो सरकारी रिपोर्ट जारी की गईं (साउथ फर्स्ट)। ये रिपोर्टें एक-दूसरे से विरोधाभासी हैं और उनके मामले, अदालती मामलों, संसदीय आंकड़ों और रिपोर्टों तथा अमेरिका में विश्वविद्यालयों की नीतियों पर केंद्रित हैं। हम मृत्यु के कारणों पर अटकलें नहीं लगाएंगे।

रोहित वेमुला: 2015 की प्रमुख घटनाएं और चिंताएं

जुलाई-अगस्त 2015 में, यानी शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में, अंबेडकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एएसए) के सदस्यों और एबीवीपी के छात्रों के बीच शारीरिक झड़प हुई (अल जज़ीरा)। 12 अगस्त 2015 को विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर द्वारा की गई जांच (12 अगस्त 2015 की रिपोर्ट) में दोनों पक्षों को कड़ी मौखिक चेतावनी दी गई और मामला बंद कर दिया गया (न्यूज़लॉन्ड्री)।

दिसंबर 2015 में वेमुला और एएसए के चार अन्य सदस्यों को छात्रावास तथा विश्वविद्यालय के अन्य हिस्सों में प्रवेश से वंचित कर दिया गया (द वायर और न्यूज़लॉन्ड्री)। सितंबर 2015 से दिसंबर 2015 तक मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) ने विश्वविद्यालय को पांच पत्र लिखे (न्यूज़लॉन्ड्री)।

एएसए के प्रदर्शनकारियों ने कहा कि कार्रवाई करने का विश्वविद्यालय प्रशासन का निर्णय केंद्रीय मंत्रियों, बंडारू दत्तात्रेय और स्मृति ईरानी द्वारा लिखे गए पत्रों से प्रभावित था (अल जज़ीरा)। ये राजनीतिक आरोप हैं। एएसए एक अंबेडकरवादी संगठन है।

जांच के दो विवरण: दो रिपोर्टें, दो दृष्टिकोण

रूपनवाल आयोग (2016)

फरवरी 2016 में मंत्रालय ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश ए.के. रूपनवाल को एक सदस्यीय आयोग के माध्यम से जांच करने के लिए नियुक्त किया (सियासत)। आयोग ने कहा कि वेमुला के पिता ‘माला’ समुदाय (अनुसूचित जाति) से नहीं, बल्कि ‘वड्डेरा’ समुदाय (पिछड़ा वर्ग) से संबंधित थे (द साउथ फर्स्ट)। अल्पसंख्यक समुदाय के किसी सदस्य की अनुपस्थिति के कारण आयोग की आलोचना हुई (सियासत)।

पुलिस की क्लोज़र रिपोर्ट (2024)

3 मई 2024 को तेलंगाना पुलिस ने उच्च न्यायालय में एक क्लोज़र रिपोर्ट दाखिल की, जिसमें कहा गया कि वेमुला दलित नहीं थे, परिवार के जाति प्रमाणपत्र जाली थे और उन्होंने अपनी ‘वास्तविक जाति के उजागर होने’ के डर से आत्महत्या की। रिपोर्ट में विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति, स्मृति ईरानी, बंडारू दत्तात्रेय और एबीवीपी नेताओं सहित सभी आरोपियों को क्लीन चिट दी गई। राजा वेमुला ने रिपोर्ट को ‘बेतुका’ कहा।

उसी दिन तेलंगाना के तत्कालीन पुलिस महानिदेशक ने कहा कि वे मृतक की मां और अन्य लोगों द्वारा उठाई गई आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए आगे की जांच कराने के लिए मजिस्ट्रेट से अनुरोध करेंगे। क्लोज़र रिपोर्ट स्वयं जून 2023 में राज्य की तत्कालीन भाजपा सरकार के कार्यकाल में तैयार की गई थी।

29 मई 2024 को तेलंगाना उच्च न्यायालय ने क्लोज़र रिपोर्ट पर विचार करते हुए सभी आरोपियों को मामले से हटा दिया और कहा कि यह साबित नहीं हुआ कि आरोपियों के कृत्य वेमुला की मृत्यु का कारण थे। इसके कई अन्य कारण हो सकते हैं। हमने आगे की जांच की रिपोर्ट नहीं देखी। इन घटनाओं के संबंध में अत्याचार निवारण अधिनियम, 1989 के कई प्रावधान विचाराधीन आते हैं।

याचिका से यूजीसी के 2026 के नियमों तक

2019 में रोहित वेमुला की मां राधिका वेमुला और पायल तडवी की मां आबेदा सलीम तडवी ने सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की। याचिका में न्यायालय से कॉलेज और विश्वविद्यालय परिसरों में निचली जातियों के सदस्यों को भेदभाव से बचाने के लिए निषेधाज्ञा जारी करने का अनुरोध किया गया।

जनवरी 2026 में न्यायालय के आदेश के तहत यूजीसी ने उच्चतर शैक्षणिक संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी यूजीसी (प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस) विनियम, 2026 प्रकाशित किए। इन विनियमों ने यूजीसी (प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस) विनियम, 2012 का स्थान लिया।

नए विनियमों ने उच्चतर शैक्षणिक संस्थानों के लिए एक समान अवसर प्रकोष्ठ (ईओसी) स्थापित करना अनिवार्य किया। नए विनियमों के विनियम 3 (1) (c) में जाति-आधारित भेदभाव को केवल अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य पिछड़ा वर्ग के सदस्यों के विरुद्ध भेदभाव के रूप में परिभाषित किया गया। इसलिए, कई याचिकाएं दायर की गईं, जिनमें यूजीसी से इन विनियमों को ‘जाति-तटस्थ’ बनाने का अनुरोध किया गया।

29 जनवरी 2026 की रोक

विनियम कानूनी लंबितता में अटके रहे और 29 जनवरी 2026 को तत्कालीन भारत के मुख्य न्यायाधीश एस.ए. बोबडे और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने यथास्थिति बनाए रखी तथा कहा कि 2012 के विनियमों को प्रभावी किया जाएगा और 2026 के विनियम ‘अस्पष्ट’ तथा ‘अत्यधिक व्यापक’ हैं (एससी ऑब्जर्वर, 2026)। याचिकाकर्ताओं की अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने कहा कि यथास्थिति बनाए रखना उचित नहीं था और 2012 के विनियमों का प्रभाव केवल उन पहलुओं तक सीमित रहेगा जो 2026 के विनियमों के अनुरूप हैं (एससी ऑब्जर्वर, 2026)।

अगस्त 2026 की सुनवाई

20 अगस्त 2026 को केंद्र सरकार ने न्यायालय को सूचित किया कि विनियम समीक्षा के अधीन हैं और न्यायालय ने अगली तारीख 20 अक्टूबर 2026 तय की। इंदिरा जयसिंह ने न्यायालय से सरकार को यह बताने का निर्देश जारी करने का आग्रह किया कि इन विनियमों का पुनर्मूल्यांकन किस अनुमानित तारीख तक किया जाएगा। भारत संघ और यूजीसी को 4 सप्ताह के भीतर याचिका पर जवाब देने का निर्देश दिया गया।

कैंपस में जाति: परिसर में जाति: संसदीय आंकड़े

दिसंबर 2021 में लोकसभा में शिक्षा मंत्री ने साझा किया कि 2014 से 2021 के बीच आईआईटी, आईआईएम और केंद्रीय विश्वविद्यालयों में 122 छात्रों ने आत्महत्या की। इनमें से 24 अनुसूचित जाति, 3 अनुसूचित जनजाति और 41 अन्य पिछड़ा वर्ग से थे (आउटलुक, पीटीआई)। इसलिए, इन तीन समूहों की कुल संख्या 68 है और यह 122 का लगभग 56% है। हमने इसकी गणना की है।

तीन अल्पसंख्यक छात्रों को जोड़ने पर यह संख्या बढ़कर लगभग 58% हो जाएगी (करियर्स360)। केंद्रीय विश्वविद्यालयों से संबंधित मामले सबसे अधिक, 37, हैं (द प्रिंट)। 2023 में राज्यसभा में साझा की गई जानकारी के अनुसार, 2018 से 2023 के बीच केंद्रीय संस्थानों में छात्रों की आत्महत्या के 98 मामले थे, जिनमें से 39 मामले आईआईटी से और 25 केंद्रीय विश्वविद्यालयों से संबंधित थे (करियर्स360)।

राज्य मंत्री, शिक्षा ने दिसंबर 2023 में साझा किया कि पिछले पाँच वर्षों के दौरान केंद्रीय विश्वविद्यालयों, आईआईटी और आईआईएम से 13,626 एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों ने पढ़ाई छोड़ दी है (Campusvarta)। हम स्कूलों और विश्वविद्यालयों से संबंधित अधिक गहन डेटा की अपेक्षा करते हैं। यहाँ साझा किया गया डेटा छात्रों के मानसिक और शारीरिक थकान तथा उनके मानसिक स्वास्थ्य को हुए नुकसान को दर्शाता है।

उच्च शिक्षा में जाति भेदभाव: उच्च शिक्षा में जातिगत भेदभाव: इन आँकड़ों पर एक नज़र

छात्रों की मौतों के संबंध में सरकार ने संसद को बताया कि ये “शैक्षणिक तनाव, पारिवारिक समस्याओं, व्यक्तिगत समस्याओं, मानसिक स्वास्थ्य और अन्य कारणों” से हुईं (Open Magazine)। आँकड़े यह नहीं दिखाते कि इनमें से कोई मामला जातिगत भेदभाव के कारण था या नहीं।

इसके अलावा, आँकड़े इन संस्थानों में एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों के कुल प्रतिशत को नहीं दर्शाते, जिसके आधार पर इस 56% का विश्लेषण किया जाना है। हमें इन उत्तरों में ऐसा कोई डेटा नहीं मिला। इसलिए, इन्हें “भेदभाव संबंधी डेटा” नहीं माना जाना चाहिए। ये कुछ सरकारी आँकड़े हैं और सरकार के पास उपलब्ध सर्वोत्तम आँकड़े हैं।

IIT में जाति भेदभाव: आईआईटी में जाति-आधारित भेदभाव: आँकड़े और संदर्भ

Careers360 और The Print के अनुसार, 2014 और 2021 के बीच आईआईटी में 13 ओबीसी और 5 एससी छात्रों ने आत्महत्या की। 2012-2014 के सूचना के अधिकार (आरटीआई) आवेदनों के आधिकारिक उत्तरों में रिपोर्ट किए गए सरकारी आँकड़ों से अलग आत्महत्या के आँकड़े बताए गए थे।

Global IIT Alumni Support Group (Open Magazine) के अनुसार, जनवरी 2021 से दिसंबर 2025 के बीच छात्रों की आत्महत्याओं की अनुमानित संख्या 65 है। यह रिपोर्ट किए गए सरकारी आँकड़ों से बहुत अधिक है। Times of India के अनुसार, 2023 तक Support Group का अनुमान उपलब्ध सर्वोत्तम डेटा था।

2023 में, छात्र की आत्महत्या के बाद, उसकी बहन और अन्य कार्यकर्ताओं ने जातिगत भेदभाव का आरोप लगाया और आईआईटी की जाँच समिति ने इन आरोपों से इनकार किया (Careers 360)। हमने आईआईटी की जाँच समिति की रिपोर्ट की समीक्षा नहीं की है।

छात्र आत्महत्या और जाति: संवेदनशील विषय

छात्रों की आत्महत्याएँ और जाति से जुड़े विषय संवेदनशील हैं। इसलिए, हमने केवल सरकारी आँकड़ों और/या न्यायालयी कार्यवाहियों से संबंधित डेटा साझा किया है। छात्र और आम जनता अनेक कारणों से तनाव में रहते हैं और उन्हें किसी से बात करने की आवश्यकता होती है।

यदि आप तनाव में हैं या किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं जो तनाव में है, तो आप आईआईटी कानपुर द्वारा संचालित Tele MANAS सेवा पर कॉल कर सकते हैं (लोकसभा उत्तर, शिक्षा मंत्रालय)। यह सेवा निःशुल्क, 24×7 उपलब्ध है और अनेक भाषाओं में सहायता प्रदान की जाती है।

अमेरिकी विश्वविद्यालयों में जाति

अमेरिका में कुछ विश्वविद्यालयों ने जाति को अपनी भेदभाव-विरोधी नीति में जोड़ा है। Brandeis ने दिसंबर 2019 में (एक स्रोत में नवंबर 2019), UC Davis ने सितंबर 2021 में, और Colby College ने भी इसे जोड़ा (University World News; Justice For All)। दिसंबर 2021 में Harvard Graduate Student Union के समझौते में जाति संरक्षित वर्ग बनी, पर ये पूरे विश्वविद्यालय की नीति नहीं है (IANS)। 1 जनवरी 2022 से California State University (अमेरिका की सबसे बड़ी चार-वर्षीय सार्वजनिक विश्वविद्यालय प्रणाली) ने जाति को अपनी नीति में जोड़ा (CNN)। 1 दिसंबर 2022 को Brown University ने इसे अपनी पूरी संस्था की नीति में जोड़ा, जो Ivy League में पहला था (CNN; American Kahani)।

इसका विरोध भी हुआ। CSU के दो प्रोफेसरों ने Hindu American Foundation (HAF) के ज़रिए मुकदमा दायर किया कि नीति हिंदुओं को अनुचित रूप से निशाना बनाती है (CNN; IANS)। हमने इस मुकदमे का नतीजा नहीं जाँचा। अमेरिका के बारे में: अमेरिका का कानूनी हाल, अमेरिकी राज्यों के बिल, सिलिकॉन वैली का मामला।

विश्वविद्यालय में जाति भेदभाव की शिकायत कहाँ करें

इस वक्त Supreme Court के आदेश से 2012 के UGC नियम लागू हैं (SC Observer; Niyam)। भेदभाव की शिकायत के रास्ते पर: शिकायत की प्रक्रिया।

विश्वविद्यालयों के मामलों के अदालती और संसदीय दस्तावेज़ अंग्रेज़ी में और बिखरे हुए हैं। Ambedkarite Educational Program (AEP) blogging, website बनाना, email marketing, AI tools और Google AI सिखाता है, ताकि चल रहे मामलों की ऐसी जानकारी अपनी साइट पर स्रोत के साथ रखी जा सके। इसकी फीस एक बार की ₹297 है और access lifetime मिलता है। Free शुरुआत के लिए Movement से जुड़ सकते हो।

निष्कर्ष

रोहित वेमुला का मामला 2019 की जनहित याचिका के ज़रिए UGC के 2026 के नियमों तक पहुँचा, जिन पर Supreme Court की रोक है और 2012 के नियम लागू हैं। उनकी जाति और मौत की जाँच पर 2016 की आयोग रिपोर्ट और 2024 की पुलिस closure report परिवार और कार्यकर्ताओं के नज़रिए से टकराती हैं, और आगे की जाँच का नतीजा हमें नहीं मिला। संसद के आँकड़े SC, ST और OBC छात्रों के ज़्यादा हिस्से (करीब 56%) की बात बताते हैं, पर वो भेदभाव का सबूत नहीं हैं। अमेरिका में कुछ विश्वविद्यालयों ने जाति को संरक्षित वर्ग बनाया है और इसका विरोध भी हुआ है। तनाव में हों तो Tele-MANAS (14416) पर बात करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

रोहित वेमुला कौन थे?
हैदराबाद विश्वविद्यालय के PhD शोधार्थी और Ambedkar Students Association के सदस्य, जिनकी 17 जनवरी 2016 को मौत हुई (Wikipedia; The Wire)।

रोहित वेमुला केस में पुलिस ने क्या कहा और परिवार ने क्या?
मई 2024 की closure report में पुलिस ने कहा कि वे दलित नहीं थे और सभी आरोपी निर्दोष हैं। परिवार ने इसे “बेतुका” कहा, और DGP ने आगे जाँच की बात की (ThePrint; AIR News)।

UGC के 2026 के नियम क्यों रुके?
13 जनवरी 2026 को अधिसूचित नियमों को Supreme Court ने 29 जनवरी 2026 को “अस्पष्ट” और “दुरुपयोग की गुंजाइश वाले” कहकर रोका। 2012 के नियम चालू हैं (LawBeat; SC Observer)।

कैंपस में जाति भेदभाव पर सरकार के आँकड़े क्या कहते हैं?
2014 से 2021 के बीच केंद्रीय संस्थानों के 122 छात्रों की आत्महत्या में 24 SC, 3 ST और 41 OBC थे। ये भेदभाव का सबूत नहीं हैं (Outlook, PTI; Open Magazine)।

अमेरिकी विश्वविद्यालयों में जाति पर क्या नीतियाँ हैं?
Brandeis, UC Davis, Colby, CSU और Brown जैसे संस्थानों ने जाति को अपनी नीतियों में जोड़ा, और CSU के मामले में मुकदमा भी हुआ (University World News; CNN)।

SOURCES

  1. ThePrint, closure report: https://theprint.in/india/rohith-vemula-was-not-a-dalit-clean-chit-to-all-accused-telangana-police-file-closure-report/2068208/
  2. The Wire, closure report: https://m.thewire.in/article/caste/telangana-police-closes-rohith-vemula-file-absolves-former-vc-and-bjp-leaders
  3. The South First: https://thesouthfirst.com/telangana/rohith-vemula-was-not-a-dalit-says-telangana-police-in-a-closure-report-gives-clean-chit-to-all-accused/
  4. AIR News: https://newsonair.gov.in/telangana-police-submits-closure-report-to-hc-in-rohit-vemula-suicide-case
  5. Deccan Herald (PTI): https://www.deccanherald.com/amp/story/india%2Ftelangana%2Frohith-vemulas-mother-meets-telangana-cm-revanth-reddy-seeks-justice-3007755
  6. Pressreader (PTI): https://www.pressreader.com/india/dt-next/20240506/281861533586463
  7. SCC Online, तेलंगाना उच्च न्यायालय (29 मई 2024): https://www.scconline.com/blog/post/2024/05/29/telhc-disposes-of-petitions-after-prosecution-files-closure-report-in-rohith-vemula-suicide-case-scc-times/
  8. The Wire, घटनाओं का क्रम: https://thewire.in/education/the-chain-of-events-leading-to-rohith-vemulas-suicide
  9. Newslaundry: https://www.newslaundry.com/2017/01/17/rohithvemula-anatomy-of-a-tragedy
  10. Al Jazeera: https://www.aljazeera.com/gallery/2016/2/1/rohith-vemula-dalit-scholar-hanged-himself-in-protest
  11. Siasat: https://archive.siasat.com/news/remembering-rohith-vemula-on-his-sixth-death-anniversary-2259818/
  12. Wikipedia, Rohith Vemula: https://en.wikipedia.org/wiki/Rohith_Vemula
  13. LiveLaw: https://www.livelaw.in/top-stories/supreme-court-stays-ugc-equity-regulations-2026-521055
  14. SC Observer: https://www.scobserver.in/journal/supreme-court-stays-2026-ugc-equity-regulations/
  15. LawBeat: https://lawbeat.in/top-stories/breaking-supreme-court-stays-ugc-regulations-2026-1560780
  16. The Wire (अगस्त 2026): https://m.thewire.in/article/law/stayed-earlier-ugc-equity-regulations-2026-are-now-under-reconsideration
  17. Niyam: https://niyam.ai/blog/ugc-equity-higher-education-regulations-2026-sc-stay
  18. Aapka Legal Advice: https://aapkalegaladvice.com/judgements/supereme-court/ugc/
  19. ThePrint, 122 छात्र: https://theprint.in/india/education/out-of-122-student-suicides-since-2014-111-at-central-univs-iits-nits-govt-tells-lok-sabha/784653/
  20. Outlook (PTI): https://www.outlookindia.com/miscellaneous/122-students-of-iits-iims-central-institutes-committed-suicide-during-2014-21-govt-news-406005
  21. Careers360, 58%: https://news.careers360.com/iit-delhi-madras-kharagpur-nit-iisc-bengaluru-iiser-sc-st-obc-suicides-dharmendra-pradhan-parliament
  22. Careers360, 98 छात्र: https://news.careers360.com/98-student-suicide-33979-dropout-iit-iim-nit-iiser-iiit-sc-st-obc-central-university-education-ministry-lok-sabha-reply
  23. Careers360, 2023: https://news.careers360.com/61-student-suicide-iit-nit-iim-5-years-education-ministry-bombay-madras-darshan-solanki
  24. Open Magazine: https://openthemagazine.com/india/iit-student-suicides-why-india-still-lacks-a-complete-count-after-75-years
  25. Campusvarta: https://www.campusvarta.com/article/over-13000-sc-st-obc-students-dropped-out-of-central-universities-iits-iims-since-2018
  26. University World News: https://www.universityworldnews.com/post.php?story=20220211105319110
  27. CNN (CSU): https://www.cnn.com/2022/01/30/us/csu-caste-protections-universities-cec/index.html
  28. CNN (Brown): https://edition.cnn.com/2022/12/07/us/brown-university-caste-protections-cec/index.html
  29. American Kahani: https://americankahani.com/community/caste-away-brown-becomes-first-ivy-league-university-to-add-caste-to-nondiscrimination-policy/
  30. IANS (NRI Pulse): https://nripulse.com/us-universities-add-policies-banning-caste-discrimination/
  31. Justice For All: https://www.justiceforall.org/campaigns/saveindia/from-india-to-america-how-caste-discrimination-followed-the-diaspora/
  32. शिक्षा मंत्रालय का लोकसभा जवाब (Tele-MANAS): https://eparlib.sansad.in/bitstream/123456789/2983754/1/AU941_UqLlOF.pdf
  33. IIT कानपुर, Tele-MANAS: https://iitk.ac.in/counsel/TeleManas.php
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