भारत में आरक्षण का अर्थ भर्ती और नौकरियों तथा शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के लिए सामाजिक समूहों हेतु कोटा, साथ ही विधानमंडल में प्रतिनिधित्व के लिए कोटा है। डीओपीटी मास्टर सर्कुलर, अगस्त 2026 के अनुसार, केंद्र सरकार की नौकरियों में 15% पद अनुसूचित जातियों, 7.5% अनुसूचित जनजातियों और 27% अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी) के लिए आरक्षित हैं।
इसके अतिरिक्त, 10% पद आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) के लिए आरक्षित हैं। इस प्रकार, संयुक्त आरक्षण 59.5% (वाजीराम एंड रवि) है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित 50% की सीमा, ईडब्ल्यूएस पर 2022 का निर्णय, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के भीतर 2024 के उप-वर्गीकरण, तथा जाति जनगणना 2027 इसी से संबंधित हैं। इस लेख में दोनों दृष्टिकोण प्रस्तुत किए गए हैं।
आरक्षण क्या है: अर्थ और संवैधानिक प्रावधान
आरक्षण का अर्थ विभिन्न सामाजिक समूहों के लिए रोजगार और शिक्षा में एक कोटा अलग रखना है। भारत के संविधान ने प्रथम संशोधन के माध्यम से सेवाओं और पदों पर नियुक्ति के लिए विभिन्न जातियों हेतु आरक्षण का प्रावधान किया (अनंतम आईएएस)। भारत के संविधान ने लोकसभा और राज्य विधानमंडलों में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए सीटों के आरक्षण का भी प्रावधान किया (मॉडल डिप्लोमैट)। संविधान के पाठ के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।
आरक्षण के प्रकार
आरक्षण को सामान्यतः जाति और जनजाति आधारित (एससी और एसटी), वर्ग आधारित (ओबीसी), आर्थिक रूप से कमजोर (ईडब्ल्यूएस) और राजनीतिक (विधानमंडलों में सीटें) के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है (वाजीराम एंड रवि; मॉडल डिप्लोमैट)।
इसके अतिरिक्त, रोजगार के संदर्भ में एससी और एसटी को पदोन्नति में भी आरक्षण का लाभ मिलता है, जबकि ओबीसी के लिए आरक्षण केवल भर्ती में है (डीओपीटी मास्टर सर्कुलर, अगस्त 2026)। इंद्रा साहनी और एक अन्य मामले में दिए गए निर्णय ने पदोन्नति में आरक्षण के विरुद्ध निर्णय दिया। इसके बाद, पदोन्नति में आरक्षण का प्रावधान करने के लिए संविधान में संशोधन किया गया (पाहुजा लॉ अकादमी)।
एससी एसटी आरक्षण: कहाँ और किस सीमा तक
केंद्र सरकार की भर्ती में एससी और एसटी के लिए आरक्षण क्रमशः 15% और 7.5% है (डीओपीटी मास्टर सर्कुलर, अगस्त 2026)। यही पदोन्नति के मामले में भी लागू है (डीओपीटी मास्टर सर्कुलर)। यही अवधारणा विधानमंडलों में सीटों के आरक्षण के मामले में भी लागू होती है (मॉडल डिप्लोमैट)।
शेष जानकारी ‘अनुसूचित जातियां और अनुसूचित जनजातियां तथा अन्य मूल आदिवासी’ पर मिल सकती है। राजनीतिक आरक्षण समाप्त करने पर: दस वर्षीय मिथक।
ओबीसी आरक्षण: मंडल और इंद्रा साहनी का संयोजन
1979 में द्वितीय पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन के बाद, 1931 की जनगणना पर आधारित एक अनुमान में ओबीसी की जनसंख्या लगभग 52% बताई गई। इस अनुमान के आधार पर ओबीसी के लिए 27% आरक्षण की सिफारिश की गई (थिंकिंगथॉरो)। अगस्त 1990 में, आयोग के गठन के 27 वर्ष बाद और रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने के लगभग 21 वर्ष बाद, तत्कालीन प्रधानमंत्री वी. पी. सिंह ने इस सिफारिश को लागू किया (अनंतम आईएएस)।
इस सिफारिश को निरस्त किए जाने का मामला इंद्रा साहनी एंड कंपनी बनाम भारत संघ में सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष लाया गया। न्यायालय ने आरक्षण और ओबीसी के ‘क्रीमी लेयर’ को बाहर रखने के पक्ष में निर्णय दिया (इंद्रा साहनी, इंडियनकानून; विकिपीडिया)।
भारत सरकार का कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग यह मानता है कि केंद्रीय स्तर पर ओबीसी आरक्षण सितंबर 1993 से लागू किया गया था (बिजनेस स्टैंडर्ड)। पृष्ठभूमि: मंडल आयोग की रिपोर्ट और अन्य पिछड़े वर्ग।
आरक्षण का इतिहास: 1902-1990
26 जुलाई 1902 के एक ऐतिहासिक आदेश में कोल्हापुर के महाराजा, शाहू महाराज ने निर्देश दिया कि सभी रिक्त राज्य सेवाएं पिछड़े वर्गों के उम्मीदवारों द्वारा भरी जाएं। इस आदेश में ‘पिछड़े वर्गों’ का अर्थ ब्राह्मणों, प्रभुओं और शेणवियों, पारसियों आदि को छोड़कर सभी जातियां और वर्ग था (द सत्यशोधक)। अधिक जानकारी के लिए: छत्रपति शाहू महाराज।
1932 में, पूना समझौते ने पृथक निर्वाचक मंडलों के स्थान पर संयुक्त निर्वाचक मंडलों में दलित वर्गों के लिए आरक्षित सीटें स्थापित कीं (थिंकिंगथॉरो)। इस पर: पृथक निर्वाचक मंडल और पूना समझौता।
1953 में, काका कालेलकर के नेतृत्व में प्रथम पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया गया (अनंतम आईएएस)। संविधान सभा में आरक्षण नीति के लिए: संविधान सभा की कहानी। 1990 में मंडल आयोग की सिफारिशें और उसी वर्ष द स्टेट ऑफ इंद्रा साहनी एंड अदर्स मामले में दिया गया निर्णय इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण कदम थे।
आरक्षण पर सर्वोच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण निर्णय
इंद्रा साहनी (1992)
इस निर्णय में नौ न्यायाधीशों की पीठ ने 50% की सीमा निर्धारित की, ओबीसी के बीच ‘क्रीमी’ लेयर को परिभाषित किया और पदोन्नति में आरक्षण पर रोक लगा दी (विकिपीडिया; वाजीराम एंड रवि)। इसमें कहा गया कि 50% की सीमा को केवल अत्यंत असाधारण परिस्थितियों में ही पार किया जा सकता है (वाजीराम एंड रवि)।
जयश्री लक्ष्मणराव पाटिल (2021)
5 मई 2021 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र में मराठों को आरक्षण देने वाले कानून को रद्द कर दिया, क्योंकि यह 50% की सीमा से अधिक था और इस नियम के अपवादों का प्रावधान नहीं किया गया था (एससी ऑब्जर्वर)।
जनहित अभियान (2022)
7 नवंबर 2022 को तीन न्यायाधीशों की पीठ ने 103वें संशोधन और 10% ईडब्ल्यूएस आरक्षण को संवैधानिक घोषित किया (जनहित अभियान, इंडियनकानून)। इस मामले में एक तर्क यह था कि 10% ईडब्ल्यूएस आरक्षण असंवैधानिक था, क्योंकि इससे एससी और एसटी के सदस्यों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता (जनहित अभियान, इंडियनकानून)।
दविंदर सिंह (2024)
1 अगस्त 2024 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि राज्य सरकारें अनुसूचित जातियों के बीच उप-वर्गीकरण कर सकती हैं (दविंदर सिंह, 2024)। इस मामले के बारे में अधिक जानकारी की प्रतीक्षा है। न्यायमूर्ति बेला त्रिवेदी एकमात्र असहमति व्यक्त करने वाली न्यायाधीश थीं (दविंदर सिंह, 2024)। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों को राष्ट्रपति की सूचियों में संशोधन करने की अनुमति नहीं है (दविंदर सिंह, 2024)।
पंजाब राज्य के संबंध में अपने निर्णय में न्यायालय ने कहा कि 1975 की अधिसूचना ने अनुसूचित जातियों के बीच वाल्मीकि और मजहबी सिख समुदायों को प्राथमिकता दी थी (दविंदर सिंह, 2024)। इस संबंध में चार अन्य न्यायाधीशों ने कहा कि अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के बीच क्रीमी लेयर की पहचान की जानी चाहिए (लाइव लॉ)।
9 अगस्त 2024 को भारत की केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कहा कि डॉ. आंबेडकर के संविधान में अनुसूचित जातियों और जनजातियों के बीच क्रीमी लेयर का प्रावधान नहीं था (द प्रिंट, पीटीआई; ट्रिब्यून)। भारत सरकार ने संसद को बताया कि क्रीमी लेयर के संबंध में टिप्पणी भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों द्वारा की गई थी (ट्रिब्यून)।
आरक्षण की सीमा: 50% पर बहस
भारत का संविधान कुल आरक्षण को 50% से अधिक करने पर रोक लगाता है (वजीराम एंड रवि; मॉडल डिप्लोमैट)। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 15(4) और 16(4) राज्य को अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए आरक्षण प्रदान करने की अनुमति देता है (मॉडल डिप्लोमैट)। आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) के लिए 10% आरक्षण को इस सीमा से अधिक माना गया (मॉडल डिप्लोमैट)।
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 16(4) राज्य को रोजगार में आरक्षण लागू करने की अनुमति देता है। तमिलनाडु राज्य की आरक्षण नीति 69% है (मॉडल डिप्लोमैट)। 2023 में, बिहार राज्य ने आरक्षण को 50% से बढ़ाकर 65% कर दिया (EWS और OBC को मिलाकर, कुल आरक्षण 75% हो गया) (TFC; कौनेल)। हालांकि, 20 जून 2024 को पटना उच्च न्यायालय ने उक्त आरक्षण नीति को रद्द कर दिया (AIR; कौनेल)।
आंकड़े: कितना भरा गया, कितना रिक्त रहा
2016 में, केंद्र सरकार में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्गों का प्रतिनिधित्व क्रमशः 17.49%, 8.47% और 21.57% था (बिजनेस स्टैंडर्ड, लोकसभा को DoPT का उत्तर)। OBC के कम आंकड़ों का कारण यह है कि OBC के लिए आरक्षण केवल सितंबर 1993 से लागू किया गया था (बिजनेस स्टैंडर्ड)।
2024-25 के बीच DoPT की रिपोर्ट के सारांश के अनुसार, 1 जनवरी 2024 को केंद्रीय सेवाओं में कर्मचारियों की कुल संख्या 32.52 लाख थी। इनमें ग्रुप A में SC कर्मचारी 14.20%, ST कर्मचारी 6.54% और OBC कर्मचारी 19.14% थे। ग्रुप B में SC कर्मचारी 16.20%, ST कर्मचारी 7.63% और OBC कर्मचारी 21.95% थे।
ग्रुप C के कर्मचारियों में ये आंकड़े क्रमशः 16.75%, 8.94% और 27.29% थे (रेस IAS)। इसलिए, स्पष्ट रूप से, ग्रुप A में तीनों श्रेणियां अपने निर्धारित कोटे से कम हैं। आंकड़े एक कोचिंग साइट के सारांश से लिए गए हैं और मूल रिपोर्ट नहीं पढ़ी गई है।
मार्च 2026 में शिक्षा मंत्रालय द्वारा लोकसभा में दिए गए उत्तरों के अनुसार, केंद्रीय उच्च शिक्षा संस्थानों में कुल 30720 पद भरे गए हैं और उनमें से 11794 आरक्षित हैं (SC 3692, ST 1561, OBC 6541)। कुल आरक्षित पद कुल पदों का लगभग 38% हैं। 1 अप्रैल 2024 को केंद्रीय विश्वविद्यालयों में लगभग 6988 पद रिक्त थे (करियर 360)। शिक्षा और जाति के बारे में।
दोनों पक्षों की दलीलें
समर्थक कहते हैं कि प्रतिनिधित्व अभी पूरा नहीं हुआ। Patna HC ने भी माना कि पर्याप्त प्रतिनिधित्व का मतलब आनुपातिक प्रतिनिधित्व नहीं है, यानी अदालतें सीमा रखती हैं (Patna HC, X पर सार)। उनके अनुसार Group A में कमी और भरे जाने वाले आरक्षित पदों की धीमी रफ़्तार दिखाती है कि नीतियाँ अधूरी हैं (Race IAS; Careers360)।
आलोचक अलग बातें कहते हैं। एक, क्रीमी लेयर: अदालत के चार जजों ने SC और ST में भी संपन्न हिस्से को पहचानने की बात कही (LiveLaw)। दो, SC और ST के भीतर असमानता, जिसके चलते Punjab जैसे राज्यों ने उप-वर्गीकरण माँगा (Finology)। तीन, 50% की सीमा और EWS पर बहस (Janhit Abhiyan, IndianKanoon)। विरोध में खड़े संगठनों पर हमारी पोस्ट: रिज़र्वेशन हटाओ आंदोलन।
दोनों पक्षों को देखें तो फैसले संख्या से ज़्यादा इस सवाल पर टिके हैं कि सही आँकड़े किसके पास हैं। ये हमारी टिप्पणी है।
जाति जनगणना 2027 और आरक्षण
केंद्र की राजनीतिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 30 अप्रैल 2025 को जनगणना में जाति गिनने का फ़ैसला किया (PIB)। Census 2027 के दो चरण हैं: मकान सूचीकरण अप्रैल से सितंबर 2026 और जनसंख्या गणना फरवरी 2027, और जाति का आँकड़ा दूसरे चरण में डिजिटल तरीके से लिया जाएगा (PIB)। 1931 के बाद पहली बार सभी जातियों की गिनती होगी (Outlook)। उसका असर आरक्षण की मात्रा और OBC के उप-वर्गीकरण की बहस पर पड़ सकता है (Model Diplomat)। ये अनुमान है। इस पर: जाति जनगणना और समाज।
आरक्षण पर बहस में आँकड़े और फैसले अक्सर आधे-अधूरे वायरल होते हैं। जल्दी से सही स्रोत के साथ Hindi में जवाब लिखना सीखने के लिए Ambedkarite Educational Program (AEP) blogging, website बनाना, email marketing, AI tools और Google AI सिखाता है। इसकी फीस एक बार की ₹297 है और access lifetime मिलता है। Free शुरुआत के लिए Movement से जुड़ सकते हो।
निष्कर्ष
भारत में आरक्षण केंद्र में SC के लिए 15%, ST के लिए 7.5% और OBC के लिए 27% है, और EWS का 10% अलग से। Supreme Court की 50% की सीमा 1992 से चल रही है, पर EWS (2022) और तमिलनाडु जैसे राज्यों में ये सीमा लाँघी जाती है, जबकि बिहार (2024) और महाराष्ट्र (2021) के कोटे रद्द हुए। एससी एसटी आरक्षण में उप-वर्गीकरण की छूट मिली, और क्रीमी लेयर पर अदालत की टिप्पणी को सरकार ने खारिज किया। जाति जनगणना 2027 से बहस के लिए नया आँकड़ा आएगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
भारत में आरक्षण कितना है?
केंद्र की सीधी भर्ती में SC 15%, ST 7.5%, OBC 27%, और EWS 10%, कुल करीब 59.5% (DoPT Master Circular, अगस्त 2026; Vajiram and Ravi)।
आरक्षण क्या है?
नौकरियों, शिक्षा या विधायिका की सीटों का तय हिस्सा कुछ समूहों के लिए अलग रखना (Vajiram and Ravi; Model Diplomat)।
एससी एसटी आरक्षण और ओबीसी आरक्षण में क्या फर्क है?
SC और ST को पदोन्नति में भी आरक्षण है, OBC को नहीं (DoPT Master Circular, अगस्त 2026)। OBC में क्रीमी लेयर बाहर है, पर केंद्र सरकार कहती है कि SC और ST के लिए क्रीमी लेयर का प्रावधान नहीं है (Indra Sawhney, IndianKanoon; ThePrint)।
आरक्षण का इतिहास क्या है?
26 जुलाई 1902 को शाहू महाराज के 50% आदेश से शुरू, फिर पूना पैक्ट (1932), संविधान, कालेलकर (1953), मंडल (1979-80) और Indra Sawhney (1992) (Wikipedia; Anantam IAS; ThinkingThorough)।
आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला क्या कहता है?
Indra Sawhney ने 50% की सीमा और क्रीमी लेयर दी, Janhit Abhiyan ने EWS को सही माना (3:2), और Davinder Singh ने SC के भीतर उप-वर्गीकरण की इजाज़त दी (Indra Sawhney, IndianKanoon; Janhit Abhiyan, IndianKanoon; Wikipedia)।
SOURCES
- DoPT Master Circular (StaffNews): https://www.staffnews.in/2026/08/reservation-in-posts-and-services-in-the-central-government-dopt-master-circular.html
- Vajiram and Ravi: https://vajiramandravi.com/current-affairs/reservation-in-india/
- Indra Sawhney, IndianKanoon: https://indiankanoon.org/doc/1363234/
- Wikipedia, Indra Sawhney: https://en.wikipedia.org/wiki/Indra_Sawhney_and_Others_v._Union_of_India
- Janhit Abhiyan, IndianKanoon: https://indiankanoon.org/doc/98959833/
- Wikipedia, Court cases related to reservation: https://en.wikipedia.org/wiki/Court_cases_related_to_reservation_in_India
- SC Observer, Maratha: https://www.scobserver.in/cases/jaishri-laxmanrao-patil-chief-minister-maharashtra-maratha-reservation-case-background/
- Wikipedia, Davinder Singh: https://en.wikipedia.org/wiki/State_of_Punjab_v._Davinder_Singh
- Verdictum: https://www.verdictum.in/court-updates/supreme-court/breaking-supreme-court-holds-with-61-majority-that-sub-classification-of-scst-categories-is-permissible-1546246
- LiveLaw: https://www.livelaw.in/amp/articles/sub-classification-scheduled-castes-reservation-creamy-layer-debate-comment-state-punjab-davinder-singh-7-judge-bench-judgment-266418
- Finology: https://blog.finology.in/recent-updates/Is-Sub-Classification-for-SCs-and-STs-Allowed
- Tribune: https://www.tribuneindia.com/news/india/wont-bring-in-creamy-layer-clause-for-sc-st-quota-pm-modi
- ThePrint (PTI): https://theprint.in/india/committed-to-constitution-no-provision-for-creamy-layers-in-sc-st-quota-union-cabinet-2/2217156/
- All India Radio, Bihar: https://www.newsonair.gov.in/patna-high-court-strikes-down-bihars-65-reservation-quota-hike
- Model Diplomat, 50% ceiling: https://modeldiplomat.com/learn/glossary/fifty-percent-ceiling-on-reservation
- Model Diplomat, Caste census: https://modeldiplomat.com/learn/glossary/caste-census
- Race IAS: https://raceias.com/current-affairs/representation-in-government-jobs
- Business Standard: https://www.business-standard.com/article/news-ani/ministries-told-to-fill-up-sc-st-obc-vacancies-through-special-recruitment-drive-says-dopt-minister-118121201315_1.html
- Careers360, मार्च 2026: https://news.careers360.com/central-universities-institutions-fill-30720-posts-sc-st-obc-slowly-education-ministry-data-parliament-reservation-nfs
- Careers360, जुलाई 2024: https://news.careers360.com/7000-posts-sc-st-obc-vacancy-central-universities-lok-sabha-education-ministry-union-budget-bjp-inc
- Wikipedia, Shahu of Kolhapur: https://en.wikipedia.org/wiki/Shahu_of_Kolhapur
- The Satyashodhak: https://thesatyashodhak.com/what-was-shahu-maharajs-historic-1902-reservation-order/
- Anantam IAS: https://anantamias.com/reservation-in-india/
- ThinkingThorough: https://thinkingthorough.com/reservation-in-india/
- Pahuja Law Academy: https://www.pahujalawacademy.com/indra-sawhney-v-union-of-india-1992-3-scc-217
- Wikipedia, NCBC: https://en.wikipedia.org/wiki/National_Commission_for_Backward_Classes
- PIB, Census 2027: https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2202983®=3&lang=1
- Outlook India: https://www.outlookindia.com/national/can-a-country-question-its-caste-india-is-counting-it-again-after-95-years
- X पर Patna HC का सार (Nethrapal): https://x.com/nethrapal/status/1803967364813181022

