भारतीय संविधान का अनुच्छेद 23 मानव तस्करी और बलात् श्रम, जिसमें बेगार और दासता के अन्य समान रूप शामिल हैं, पर प्रतिबंध लगाता है। इस प्रावधान का उल्लंघन आपराधिक दायित्व को आकर्षित करेगा (भारत का संविधान, अनुच्छेद 23; जीके टुडे)।
25 अक्टूबर 1975 से पूरे भारत में बंधुआ मजदूरी को समाप्त घोषित किया गया था (जनजातीय मामलों के मंत्रालय के बजाय श्रम और रोजगार मंत्रालय, पीआईबी, 28 जुलाई 2025)। हालांकि, वर्तमान तिथि तक केवल 2,97,038 व्यक्तियों को बंधुआ मजदूरी से मुक्त किया गया है (डेक्कन हेराल्ड, पीटीआई; संसदीय समिति की रिपोर्ट)। सरकार का उद्देश्य वर्ष 2030 तक 1.84 करोड़ बंधुआ मजदूरों को मुक्त करना है (इंडियास्पेंड)।
यह लेख भारतीय संविधान के अनुच्छेद 23 के पाठ, संबंधित वैधानिक और कानूनी प्रावधानों, लाभार्थियों को प्रदान की गई सहायता की राशि, जाति संबंधी आंकड़ों, मुक्ति की प्रक्रिया और सहायक सामग्री पर केंद्रित है।
अनुच्छेद 23 क्या कहता है
संविधान का अनुच्छेद 23 (1) मानव तस्करी के सभी रूपों और उन श्रम प्रणालियों पर प्रतिबंध लगाता है जिनमें दासता और बलात् श्रम शामिल हैं, जिसमें बेगार और अन्य समान प्रणालियां भी शामिल हैं। जो कोई इस अनुच्छेद के प्रावधानों का उल्लंघन करेगा, वह कानून के तहत दंड का भागी होगा (जीकेटुडे)।
भारत के संविधान का अनुच्छेद 23 (2) राज्य को जनता के लिए अनिवार्य सेवा की व्यवस्था लागू करने की अनुमति देता है। हालांकि, ऐसा करते समय राज्य निम्नलिखित में से किसी के आधार पर यह व्यवस्था लागू नहीं कर सकता: धर्म, नस्ल, जाति और वर्ग (जीकेटुडे)। यह हिंदी संस्करण हमारा अनुवाद है। भारत के संविधान, 1950 का पाठ: “बेगार” का शाब्दिक अर्थ बिना मजदूरी के बलात् श्रम है (जीकेटुडे)।
अनुच्छेद 23 राज्य और गैर-राज्य दोनों पक्षों द्वारा कुछ गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने के राज्य के दायित्व का उल्लेख करता है (जोहारी, डी फैक्टो लॉ का उद्धरण)। संसद को अनुच्छेद 35 द्वारा ऐसे कृत्यों को प्रतिबंधित करने के लिए कानून बनाने का अधिकार दिया गया है (डी फैक्टो लॉ)। मौलिक अधिकारों के अनुच्छेदों में अनुच्छेद 17 और 21 क्रमशः ‘अस्पृश्यता’ के निषेध और अस्पृश्यता के उन्मूलन का प्रावधान करते हैं (एडिटोरियल फ्रैक्शंस, लीगल बिट्स का उद्धरण)।
सर्वोच्च न्यायालय के फैसले
सर्वोच्च न्यायालय के 1982 के पीपुल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स एंड अदर्स बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले के निर्णय (एशियन गेम्स वर्कर्स जजमेंट) में कहा गया है कि ‘किसी व्यक्ति को ऐसी स्थिति में रखना, जिसमें वह न्यूनतम मजदूरी से कम पर काम करने के लिए विवश हो’, ‘बलात् श्रम’ के समान है (लीगेसीआईएएस; अंडरस्टैंडयूपीएससी)।
बंधुआ मुक्ति मोर्चा एंड अदर्स बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले में 1984 के निर्णय में न्यायालय ने पहले के निर्णय में दिए गए निर्देशों की सराहना की, जिनके अनुसार राज्य को बंधुआ मजदूरी के मामलों की पहचान करने और उनकी मुक्ति का प्रावधान करने के लिए एक योजना बनानी आवश्यक है (लीगेसीआईएएस; अंडरस्टैंडयूपीएससी)। हमने इनमें से किसी भी निर्णय की समीक्षा नहीं की है। श्रम और अन्य संबंधित मुद्दों के संबंध में, आंबेडकर ने अपनी अन्य कृतियों में ऐसे मुद्दों पर विस्तारपूर्वक और विस्तृत रूप से विचार किया है।
बँधुआ मजदूरी क्या है
बंधुआ मजदूरी वह स्थिति है जिसमें कोई व्यक्ति किसी ऋण को चुकाने के लिए कम या बिना मजदूरी के काम करने के लिए बाध्य होता है (आईएमपीआरआई)। बंधुआ मजदूरी प्रथा उन्मूलन अधिनियम, 1976 के अधिनियमित होने की तारीख से बंधुआ मजदूरी प्रणाली को समाप्त माना गया और सभी बंधुआ मजदूरों को अपने बंधन से मुक्त कर दिया गया (रिस्पॉन्सिबल बिज़)। विकिपीडिया के अनुसार, इस अधिनियम में बंधुआ मजदूरी प्रणाली और प्रभावित व्यक्तियों के ऋण को स्वतः समाप्त करने का प्रावधान किया गया था (विकिपीडिया)। मैला ढोने के संबंध में, कृपया प्रैक्टिकल इंटरनेशनल लॉ देखें।
बँधुआ मजदूरी उन्मूलन अधिनियम 1976: प्रावधान और दंड
यह अधिनियम 9 फरवरी 1976 को बनाया गया था, लेकिन उस समय से पूर्व 25 अक्टूबर 1975 से प्रभावी माना गया, जब अध्यादेश की घोषणा की गई थी (विकिपीडिया)। अधिनियम के अनुसार, तमिलनाडु और अन्य राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों को बंधुआ मजदूरों की पहचान कर उन्हें मुक्त करना और पुनर्वास प्रदान करना आवश्यक है (श्रम और रोजगार मंत्रालय, पीआईबी, 2025)।
जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) और उप-मंडल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) को अधिनियम के अनुसार कुछ कार्य करने होते हैं (श्रम और रोजगार मंत्रालय, पीआईबी, 2025)। उनकी सहायता के लिए जिला और उप-मंडल स्तर पर सतर्कता समितियां गठित की जाती हैं (धाराएं 13 और 14), और कार्यकारी मजिस्ट्रेटों को न्यायिक मजिस्ट्रेट की शक्तियां प्राप्त हैं (श्रम और रोजगार मंत्रालय, पीआईबी, 2025)।
दंड: अधिनियम में किसी व्यक्ति को बंधुआ मजदूर के रूप में रखने के लिए तीन वर्ष तक के कारावास और ₹2,000 के जुर्माने का प्रावधान है (धारा 16)। बंधुआ ऋण लेना भी इसी प्रकार के दंड को आकर्षित करता है (धारा 17) (दिल्ली श्रम विभाग, अधिनियम का पाठ)। जुर्माने की राशि 1976 में निर्धारित की गई थी।
हमने यह देखने के लिए अन्य कानूनों की जांच नहीं की है कि बंधुआ मजदूरों को शोषण से कैसे बचाया जाता है। अत्याचारों से सुरक्षा अत्याचार निवारण अधिनियम, 1989 के अंतर्गत आती है।
बँधुआ मजदूर पुनर्वास योजना: केंद्रीय योजना की जानकारी
बंधुआ मजदूरों के पुनर्वास को सुगम बनाने वाली योजना 1978 में लागू हुई, 2016 में अद्यतन की गई और 27 जनवरी 2021 को बंधुआ मजदूरों के पुनर्वास के लिए केंद्रीय क्षेत्र योजना, 2021 के रूप में प्रकाशित की गई (श्रम और रोजगार मंत्रालय)।
इस योजना के अनुसार, केंद्र सरकार बंधुआ मजदूरों को निम्नलिखित वित्तीय सहायता प्रदान करती है: वयस्क पुरुष के लिए एक लाख रुपये; महिला बंधुआ मजदूरों, बच्चों और/या विधवाओं तथा उन बच्चों के लिए दो लाख रुपये जो बंधुआ मजदूर थे और/या जिन्हें भीख मांगने के लिए मजबूर किया गया था; और उन व्यक्तियों के लिए तीन लाख रुपये जिनका गंभीर रूप से शोषण किया गया हो और जिनमें ट्रांसजेंडर व्यक्ति, साथ ही वे महिलाएं और बच्चे शामिल हो सकते हैं, जिन्हें बंधुआ दासता और/या यौन दासता और/या तस्करी से मुक्त कराया गया हो और जो दिव्यांग हों (श्रम और रोजगार मंत्रालय, 2025; पीआईबी, 2025)।
इसके अतिरिक्त, 30,000 रुपये अंतरिम सहायता के रूप में दिए जा सकते हैं (पीआईबी, 2025)। यह वित्तीय सहायता पूरी तरह भारत सरकार द्वारा वहन की जाती है (राज्यसभा, तारांकित प्रश्नों के उत्तर, संख्या 1395, 2 जनवरी 2019)।
रिहाई प्रमाणपत्र और दोषसिद्धि की शर्त
एसओपी के अनुसार, जिला दंडाधिकारी को बंधुआ मजदूर की रिहाई के 24 घंटे के भीतर वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए रिहाई प्रमाणपत्र जारी करना आवश्यक है (आईएमपीआरआई)। पुनर्वास राशि दोषसिद्धि के प्रमाणपत्र, यदि कोई हो, प्रस्तुत करने पर जारी की जाती है (श्रम एवं रोजगार मंत्रालय)। हालांकि, 2021 में एनएचआरसी का मत था कि पुनर्वास को दोषसिद्धि से जोड़ना उचित नहीं है (आईएमपीआरआई)।
इस योजना की वैधता वित्तीय वर्ष 2021-22 से वित्तीय वर्ष 2025-26 तक है (श्रम एवं रोजगार मंत्रालय का आदेश)। इस अवधि के बाद, हमारे पास इस योजना के बारे में कोई जानकारी नहीं है। नवीनतम जानकारी के लिए श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की वेबसाइट पर जाना चाहिए।
भारत में बँधुआ मजदूर: कितने मिले, कितनों का पुनर्वास हुआ
मार्च 2025 की संसदीय स्थायी समिति के आंकड़ों के अनुसार, 1978 से अब तक 2,97,038 बंधुआ मजदूरों को मुक्त कर पुनर्वासित किया गया है और सरकार द्वारा 106.25 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं (डेक्कन हेराल्ड, पीटीआई के अनुसार)। सरकार ने वर्ष 2023 में आंकड़े जारी किए, जिनके अनुसार 3,15,302 बंधुआ मजदूरों को मुक्त किया गया और उनमें से 94% (अर्थात् 2,96,305) का पुनर्वास किया गया (इंडियास्पेंड के अनुसार)।
यह उल्लेखनीय है कि किसी विशेष वर्ष के दौरान मुक्त और पुनर्वासित किए गए बंधुआ मजदूरों की संख्या के संबंध में सरकार के आंकड़े गिरावट की प्रवृत्ति दर्शाते हैं; 2022-23 में 673, 2023-24 में 468 और वर्ष 2024-25 के पहले 11 महीनों में 246 (पीटीआई, डेक्कन हेराल्ड)। संसदीय स्थायी समिति के मत में, संख्या में गिरावट “उत्साहजनक” है, लेकिन फिर भी बंधुआ मजदूरी की घटनाएं बढ़ रही हैं (पीटीआई, डेक्कन हेराल्ड)।
2030 का लक्ष्य
इंडियास्पेंड का कहना है कि सरकार 2030 तक बाल श्रम समाप्त करने के अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में संभवतः विफल रहेगी, क्योंकि वह अपने लक्ष्य से 98% पीछे रहने की दिशा में आगे बढ़ रही है। जनवरी 2025 तक, सरकार ने बाल श्रम समाप्त करने के लिए आवंटित बजट का केवल 6% खर्च किया था। 2017 और 2022 के बीच, केवल सात भारतीय राज्यों ने बंधुआ मजदूरी के मामलों की पहचान किए जाने की सूचना दी (राज्यसभा का उत्तर, आईएसबी भारती इंस्टीट्यूट द्वारा उद्धृत)।
बँधुआ मजदूरी और जाति: आंकड़े क्या कहते हैं?
केंद्र और राज्य सरकारों ने बंधुआ मजदूरी से संबंधित जाति-आधारित आंकड़े साझा नहीं किए। एनसीआरबी द्वारा प्रकाशित आंकड़े अलग-अलग पद्धतियों और रूपरेखाओं का उपयोग करते हैं। 2020 में, कुल 2,837 व्यक्तियों के बंधुआ मजदूरी के पीड़ित होने की सूचना दी गई, और इनमें से 43% अनुसूचित जातियों (एससी) और अनुसूचित जनजातियों (एसटी) से थे (स्क्रॉल, इंडियास्पेंड)।
2022 में, कुल 1,600 व्यक्तियों के बंधुआ मजदूरी के पीड़ित होने की सूचना दी गई, जिनमें से 86% एससी/एसटी से थे और शेष यूपी से थे (इंडियास्पेंड)। इसलिए, हाल के वर्षों में एससी/एसटी से संबंधित पीड़ितों का प्रतिशत 43% से बढ़कर 86% हो गया है।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि आंकड़े केवल बंधुआ मजदूरी के पहचाने गए मामलों का अनुमान देते हैं। वास्तविक संख्या काफी अधिक होने की संभावना है। इस आंकड़े में वे मामले शामिल नहीं हैं, जिनमें पीड़ितों की पहचान दर्ज नहीं की गई है। हमारे पास उपलब्ध जानकारी के आधार पर, हम निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि सभी बंधुआ मजदूर केवल एससी/एसटी श्रेणियों से नहीं हैं। भारत के इतिहास में वंशानुगत दासता के मामले रहे हैं, उदाहरण के लिए, ‘वतनदार महार’ और ‘बलुता’ व्यवस्था।
आधुनिक गुलामी: दुनिया और भारत
ILO, Walk Free और IOM के 2021 के वैश्विक अनुमान के अनुसार दुनिया में 4.96 करोड़ लोग “आधुनिक गुलामी” में थे। इनमें 2.76 करोड़ बलात् श्रम और 2.2 करोड़ जबरन विवाह में थे (ILO)। Walk Free के Global Slavery Index 2023 के अनुसार 2021 में भारत में 1.1 करोड़ लोग आधुनिक गुलामी में थे, जो किसी भी देश से ज़्यादा है (Walk Free; Business Standard)। इस संख्या में जबरन विवाह भी शामिल है, यानी ये सिर्फ बँधुआ मजदूरी की संख्या नहीं है। बँधुआ मजदूरी आधुनिक गुलामी का एक रूप है (IMPRI)। ये अनुमान हैं, गिनती नहीं। कारोबार की कड़ियों में बलात् श्रम पर: सप्लाई चेन की कड़ियाँ।
बँधुआ मजदूर कैसे छुड़ाएँ: प्रक्रिया
कानून के हिसाब से पहचान और रिहाई की ज़िम्मेदारी ज़िला मजिस्ट्रेट और उप-मंडल मजिस्ट्रेट की है (श्रम और रोज़गार मंत्रालय, PIB, 2025)। इसलिए पहला कदम है ज़िला या उप-मंडल मजिस्ट्रेट के कार्यालय में, और ज़रूरत हो तो पुलिस और श्रम विभाग में शिकायत करना। मजिस्ट्रेट जाँच के बाद रिहाई प्रमाणपत्र देता है (IMPRI)। उसके बाद पुनर्वास की मदद का रास्ता खुलता है (IMPRI)। मुकदमा कार्यकारी मजिस्ट्रेट सुनता है (श्रम और रोज़गार मंत्रालय, PIB, 2025)। NHRC और राज्य मानवाधिकार आयोग भी अधिकारियों के साथ जागरूकता कार्यक्रम चलाते हैं (श्रम और रोज़गार मंत्रालय, PIB, 2025)। ये सामान्य जानकारी है, कानूनी सलाह नहीं। हमने किसी helpline का नंबर नहीं जाँचा, इसलिए नहीं लिखा। अपने ज़िले के श्रम विभाग से संपर्क करें।
बँधुआ मजदूरी पर संसद के जवाब और स्थायी समिति की रिपोर्टें सार्वजनिक हैं, पर Hindi में स्रोत के साथ उनका सार कम मिलता है। Ambedkarite Educational Program (AEP) blogging, website बनाना, email marketing, AI tools और Google AI सिखाता है, ताकि इन दस्तावेज़ों का सार अपनी साइट पर रखा जा सके। इसकी फीस एक बार की ₹297 है और access lifetime मिलता है। Free शुरुआत के लिए Movement से जुड़ सकते हो।
निष्कर्ष
अनुच्छेद 23 बेगार और बलात् श्रम पर रोक लगाता है और इसे दंडनीय बनाता है। 1976 के कानून ने बँधुआ मजदूरी की व्यवस्था खत्म घोषित की, पर 1978 से अब तक सिर्फ करीब तीन लाख मजदूरों का पुनर्वास हुआ और पिछले तीन सालों में संख्या घटती गई। पुनर्वास की राशि ₹1 से ₹3 लाख है, पर उसे पाने के लिए रिहाई प्रमाणपत्र चाहिए और बड़ा हिस्सा दोषसिद्धि से जुड़ा है, जिसे NHRC ने अनुचित बताया था। दर्ज पीड़ितों में SC और ST का हिस्सा बड़ा है, पर साल और माप के हिसाब से आँकड़ा बदलता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अनुच्छेद 23 क्या कहता है?
मानव के दुर्व्यापार, बेगार और इसी तरह के बलात् श्रम पर रोक, और उल्लंघन कानून के अनुसार दंडनीय अपराध है। राज्य अनिवार्य सेवा लगा सकता है, पर सिर्फ धर्म, मूलवंश, जाति या वर्ग के आधार पर भेदभाव नहीं करेगा (GKToday)।
बँधुआ मजदूरी क्या है?
कर्ज़ या पेशगी चुकाने के लिए, अक्सर बहुत कम या बिना मज़दूरी के, जबरन काम करना (IMPRI)।
बँधुआ मजदूरी उन्मूलन अधिनियम 1976 में सज़ा क्या है?
तीन साल तक की कैद और ₹2,000 तक का जुर्माना, बँधुआ कर्ज़ देने पर भी यही (Delhi Labour Department, अधिनियम का पाठ)।
बँधुआ मजदूर पुनर्वास योजना में कितनी राशि मिलती है?
₹1 लाख (बालिग पुरुष), ₹2 लाख (बच्चे और महिलाएँ) और ₹3 लाख (अत्यंत शोषण के मामले), और तुरंत सहायता ₹30,000 तक (श्रम और रोज़गार मंत्रालय)।
बँधुआ मजदूरी और जाति का क्या संबंध है?
NCRB के अनुसार दर्ज पीड़ितों में SC और ST का हिस्सा 2020 में 43% और 2022 में 86% था (Scroll; IndiaSpend)। राष्ट्रीय स्तर का पूरा जाति-वार आँकड़ा हमें नहीं मिला।
SOURCES
- GKToday, अनुच्छेद 23 और 24: https://www.gktoday.in/article-23-24-of-constitution-of-india-and-rights-against-exploitation/
- Manupatra, Constitutional Law of India, अध्याय 9: http://student.manupatra.com/Academic/Abk/Constitutional-Law-of-India/CHAPTER-9.htm
- LegacyIAS, अनुच्छेद 23: https://www.legacyias.com/article-23-bonded-labour-trafficking-begar/
- UnderstandUPSC: https://www.understandupsc.com/article-231-of-the-constitution-of-india/
- De Facto Law: https://www.defactolaw.in/post/article-23-prohibition-of-traffic-in-human-beings-and-forced-labor
- Wikipedia, Bonded Labour System (Abolition) Act, 1976: https://en.wikipedia.org/wiki/Bonded_Labour_System_(Abolition)_Act,_1976
- Delhi Labour Department, अधिनियम का पाठ: https://labour.delhi.gov.in/it/bonded-labour-system-act-1976
- Responsible Biz: https://responsiblebiz.org/bonded-labour-system-abolition-act-1976/
- श्रम और रोज़गार मंत्रालय, PIB (28 जुलाई 2025): https://labour.gov.in/sites/default/files/pib2149348.pdf
- श्रम और रोज़गार मंत्रालय, बँधुआ मजदूर पुनर्वास योजना: https://labour.gov.in/bonded-labour
- श्रम और रोज़गार मंत्रालय, योजना 2021 का आदेश (PDF): https://labour.gov.in/sites/default/files/20220208154105_compressed.pdf
- राज्यसभा का जवाब (2 जनवरी 2019): https://rsdebate.nic.in/bitstream/123456789/693143/2/PQ_247_02012019_U2340_p276_p278.pdf
- IMPRI, पुनर्वास योजना: https://www.impriindia.com/insights/policy-update/the-bonded-labour-rehabilitationscheme/
- IMPRI, 2016 की योजना: https://www.impriindia.com/insights/policy-update/rehabilitation-of-bonded-labourers-2016-issues-and-challenges/
- IndiaSpend: https://www.indiaspend.com/governance/indias-fight-against-bonded-labour-a-tale-of-delayed-rehabilitation-956126
- Newslaundry (IndiaSpend की रिपोर्ट): https://www.newslaundry.com/2025/06/09/indias-fight-against-bonded-labour-a-tale-of-delayed-rehabilitation
- Deccan Herald, PTI (29 मार्च 2025): https://www.deccanherald.com/amp/story/india%2Fnearly-250-freed-from-bonded-labour-in-india-between-april-2024-january-2025-3468690
- Scroll: https://scroll.in/article/1083349/indias-efforts-to-rescue-bonded-labourers-undone-by-delayed-rehabilitation
- ISB Bharti Institute: https://blogs.isb.edu/bhartiinstitute/2025/10/24/beyond-abolition-the-unjust-loophole-keeping-bonded-labour-alive-in-india/
- Walk Free, भारत का देश-अध्ययन: https://www.walkfree.org/global-slavery-index/country-studies/india/
- ILO, Global Estimates of Modern Slavery (IOM प्रति): https://publications.iom.int/system/files/pdf/ILO-GEMS-2022_0.pdf
- Business Standard: https://www.business-standard.com/india-news/global-slavery-index-2023-g20-nations-fuelling-modern-slavery-123061300720_1.html

