जाति भेदभाव की शिकायत कैसे करें? जातिगत भेदभाव की शिकायतों को स्थिति की प्रकृति के आधार पर संभाला जाएगा। यदि स्थिति में अपमान, दुर्व्यवहार या किसी भी प्रकार की हिंसा शामिल है, तो प्रक्रिया पुलिस में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराना है। (Act, tribal.nic.in)
अनुसूचित जातियों के सदस्यों के रोजगार तथा अन्य सेवाओं और अधिकारों से संबंधित मामलों के लिए प्रक्रिया राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) है। मानवाधिकारों के उल्लंघन को भी राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अंतर्गत शामिल किया जाता है, लेकिन केवल एक वर्ष की अवधि के भीतर (iPleaders)। अन्य प्रक्रियात्मक और रोजगार से संबंधित मामले भी NCSC के अंतर्गत आते हैं। (NCSC)
यह सामान्य जानकारी है और इसे कानूनी सलाह नहीं माना जाना चाहिए। व्यक्तिगत स्थिति के लिए किसी वकील से परामर्श किया जाना चाहिए। इस पोस्ट में दी गई जानकारी अब वर्तमान न भी हो सकती है। संबंधित प्राधिकरणों द्वारा बदलाव किए गए हो सकते हैं। दिए गए टेलीफोन नंबरों और वेबसाइटों का व्यक्तिगत रूप से सत्यापन नहीं किया गया है।
जातिसूचक गाली की शिकायत: जाति के आधार पर अपशब्द
वे कब कार्रवाई योग्य बनते हैं?
जब कोई व्यक्ति, जो किसी अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से संबंधित नहीं है, जानबूझकर किसी अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से संबंधित व्यक्ति का इस प्रकार अपमान या भयादोहन करता है, जिससे उस व्यक्ति की जाति के सदस्यों की दृष्टि में उस व्यक्ति के सम्मान या प्रतिष्ठा में कमी आए, और ऐसा अपमान या भयादोहन सार्वजनिक रूप से किया जाता है, तो यह अपराध माना जाएगा (Kanoon Mitra, Section 3 (1) (r))।
यही कृत्य तब भी अपराध माना जाएगा, जब अपमान या भयादोहन सार्वजनिक दृष्टि में हो और अपराधी द्वारा जाति के नाम का उपयोग करके किया गया हो (Kanoon Mitra, Section 3 (1) (s))। इस अपराध के लिए कम से कम 6 महीने के कारावास और जुर्माने का दंड है (tribal.nic.in)। इसी कृत्य के अन्य विवरण tribal.nic.in पर उपलब्ध हैं। इस कानून के बारे में विस्तार से: SC/ST Act।
सर्वोच्च न्यायालय का फैसला
सर्वोच्च न्यायालय ने 5 नवंबर, 2020 को Hitesh Verma v. State of Uttarakhand मामले में दो तत्वों का उल्लेख किया: जानबूझकर किया गया अपमान या भयादोहन और “सार्वजनिक दृष्टि में कोई स्थान” (Hitesh Verma, IndianKanoon)। सार्वजनिक दृष्टि के संबंध में न्यायालय ने कहा कि ऐसे कई स्थान हो सकते हैं जो जनता के लिए खुले न हों, लेकिन सार्वजनिक दृष्टि में हों। उदाहरण देते हुए न्यायालय ने मुख्य सड़क पर स्थित किसी घर का द्वार या उसके सामने का लॉन बताया (Hitesh Verma, IndianKanoon)।
केवल अपमान इस अपराध की आवश्यकताओं को पूरा नहीं करेगा; व्यक्ति का अपमान उसकी जाति के कारण करने का आशय भी होना चाहिए (Allahabad High Court; Daaman)।
सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में माना है कि किसी सरकारी कर्मचारी द्वारा अपने कार्यालय में किसी अन्य व्यक्ति की अनुपस्थिति में किया गया दुर्व्यवहार SC/ST Act, 1989 की धारा 2(c) के अर्थ में सार्वजनिक स्थान नहीं माना जाएगा (LawWeb)। इसलिए, आपकी शिकायत में घटना के स्थान को स्पष्ट रूप से निर्दिष्ट और पहचाना जाना चाहिए। व्यक्ति का उसकी जाति के कारण अपमान करने का आशय भी आरोपित और स्थापित किया जाना चाहिए। कानून के प्रावधानों के संबंध में हमारे अनुभव और समझ के आधार पर उपर्युक्त सुझाव दिए गए हैं।
एससी एसटी एक्ट में एफआईआर कैसे दर्ज करें: SC/ST Act के तहत FIR दर्ज कराना
नियम 5 के अनुसार, जब किसी पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी को मौखिक रूप से सूचना दी जाती है, तो उस अधिकारी का दायित्व है कि वह आवश्यक होने पर किसी मध्यस्थ की सहायता से उसे लिखित रूप में दर्ज करे, सूचना देने वाले व्यक्ति को पढ़कर सुनाए और उसके बाद उस पर हस्ताक्षर करे (SC/ST Rules, 1995, Rule 5(1), tribal.nic.in)। ऐसी सूचना, चाहे लिखित हो या लिखित रूप में दर्ज की गई हो, सूचना देने वाले व्यक्ति को तुरंत और निःशुल्क दी जानी चाहिए (Rule 5(2), tribal.nic.in)।
इसी प्रकार, मौखिक सूचना को लिखित रूप में दर्ज करना और उसे सूचना देने वाले व्यक्ति को पढ़कर सुनाना, Act की धारा 4(2)(a) के तहत भी किया जाना आवश्यक है (Asha v. State of Uttar Pradesh, Allahabad High Court, January 6, 2025, IndianKanoon)।
नई संहिता (BNSS) की धारा 173
नई 2023 दंड प्रक्रिया संहिता (BNSS) के अनुसार, संज्ञेय अपराध से संबंधित सूचना मौखिक या इलेक्ट्रॉनिक रूप से अपनी पसंद के किसी भी पुलिस थाने में दी जा सकती है (‘Zero FIR’), और FIR की एक प्रति निःशुल्क दी जानी चाहिए (Niyam, iPleaders)। इलेक्ट्रॉनिक सूचना को तभी दर्ज माना जाता है, जब सूचनाकर्ता ऐसी सूचना की तारीख से 03 दिनों के भीतर उस पर हस्ताक्षर कर दे (Niyam, iPleaders)। हाल ही में प्रकाशित कानूनी ब्लॉगों में यही उपलब्ध जानकारी है।
जाँच और राहत
जांच अधिकारी DSP से नीचे के पद का नहीं हो सकता। जांच और आरोपपत्र दाखिल करना 60 दिनों के भीतर होना चाहिए (SC/ST Rules 2018 and amendments)। पीड़ित और उसके परिवार को आदेश की तारीख से 7 दिनों के भीतर राहत प्रदान की जाती है (Rule 12(4))।
अनुसूची 1 के अनुसार, FIR दर्ज होने और चिकित्सीय जांच के बाद राहत प्रदान की जाती है (SC/ST Rules 2004, Annexure I)। राहत की राशि सरकार द्वारा समय-समय पर निर्धारित की जाती है। इसलिए, इसकी नवीनतम राशि की पुष्टि सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय से की जा सकती है। Act की धारा 18A के प्रावधान के तहत FIR के लिए कोई प्रारंभिक जांच आवश्यक नहीं है (LawBeat)।
पुलिस एफआईआर दर्ज न करे तो क्या करें: यदि पुलिस FIR दर्ज न करे तो क्या करें?
SC/ST Rules के नियम 5(3) के अनुसार, यदि किसी पुलिस थाने का प्रभारी अधिकारी सूचना दर्ज करने से इनकार करता है, तो प्रभावित व्यक्ति को सूचना का संक्षिप्त विवरण तैयार करके डाक द्वारा संबंधित पुलिस अधीक्षक (SP) को भेजने का अधिकार है। SP का दायित्व है कि वह स्वयं जांच करे या उप पुलिस अधीक्षक (DSP) या उससे ऊपर के पद के अधिकारी से जांच करवाए और उचित कार्रवाई करे (Rule 5(3), Tribal.nic.in, The Legal Bridge)।
मूल प्रक्रिया भी अधिक जटिल होती जा रही है। BNSS की धारा 173(4) के अनुसार, किसी व्यक्ति को पुलिस अधीक्षक (SP) को लिखित शिकायत करनी होती है और उसके बाद BNSS की धारा 175(3) की आवश्यकताओं के अनुसार मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन करना होता है (iPleaders; ALEC)।
सर्वोच्च न्यायालय ने Lalita Kumari बनाम उत्तर प्रदेश सरकार मामले में निर्णय दिया है कि संज्ञेय अपराध किए जाने की सूचना प्राप्त होने पर अधिकारियों के लिए FIR दर्ज करना अनिवार्य है (iPleaders; ALEC)। BNSS के अनुसार, BNSS के तहत अपना कर्तव्य निभाने में विफल रहने वाले लोक सेवक को छह महीने से एक वर्ष तक के कारावास से दंडित किया जा सकता है (अधिनियम का पाठ, tribal.nic.in)। कुछ वकीलों ने रिट याचिका दायर करने की राय का भी समर्थन किया है, जिसकी हमने पुष्टि नहीं की है।
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग में शिकायत: अनुसूचित जातियों के लिए राष्ट्रीय आयोग को शिकायत
भारत के संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत अनुसूचित जातियों के लिए राष्ट्रीय आयोग (NCSC) की स्थापना की गई। इसके अंतर्गत अत्याचार एवं नागरिक अधिकारों का संरक्षण, सेवा तथा आर्थिक और सामाजिक कल्याण विभाग हैं। (NCSC; Legal Service India)।
NCSC शिकायतें निःशुल्क स्वीकार करता है (NCSC, शिकायत दिशानिर्देश)। कोई व्यक्ति डाक द्वारा (5वीं मंजिल, लोक नायक भवन, खान मार्केट, नई दिल्ली), टोल-फ्री नंबर 1800 11 8888 के माध्यम से या NCSC e-GMP पोर्टल (ncsccmis.nic.in) के माध्यम से आयोग से संपर्क कर सकता है (NCSC, शिकायत दिशानिर्देश)। आयोग शिकायतकर्ता को शिकायत के पंजीकरण और उसकी स्थिति के बारे में सूचित करता है (NCSC, शिकायत दिशानिर्देश)।
NCSC की सीमाएँ
शिकायतें NCSC को प्रस्तुत नहीं की जानी चाहिए यदि उन पर पहले से किसी न्यायालय में कार्यवाही चल रही हो, वे पारिवारिक मामलों से संबंधित हों, या उनका NCSC से कोई संबंध न हो। NCSC कोई न्यायालय नहीं है। इसकी शक्तियाँ सिविल न्यायालय तक सीमित हैं और यह डिक्री जारी नहीं कर सकता। (Legal Service India, सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों का हवाला देते हुए)
अनुसूचित जनजातियों के विरुद्ध अत्याचारों के लिए एक अलग आयोग (NCST) है (Wikipedia)।
जाति भेदभाव की ऑनलाइन शिकायत: जातिगत भेदभाव के लिए ऑनलाइन शिकायत
NCSC की वेबसाइट (ncsccmis.nic.in) का उपयोग करके ऑनलाइन शिकायतें की जा सकती हैं और वे अत्याचारों, सेवा या सामाजिक-आर्थिक मामलों से संबंधित हो सकती हैं। शिकायतें 500 शब्दों से कम होनी चाहिए और सहायक साक्ष्य, जिनमें जाति प्रमाणपत्र तथा ऑडियो/वीडियो फाइलें शामिल हैं, अपलोड किए जा सकते हैं। (NCSC, ऑनलाइन शिकायत दिशानिर्देश)।
दूसरा, e-FIR (जैसा कि ऊपर BNSS की धारा 173 में उल्लेख किया गया है, 3 दिनों के भीतर हस्ताक्षर आवश्यक हैं)। तीसरा, NHRC पोर्टल (hrcnet.nic.in), जिसमें भाषा (अंग्रेज़ी/हिंदी) चुनकर फॉर्म भरा जाता है और पंजीकरण संख्या द्वारा स्थिति सत्यापित की जाती है (Sansa Legal)। हमने राज्य-वार e-FIR पोर्टल के पते की जाँच नहीं की है।
मानवाधिकार आयोग में जाति भेदभाव की शिकायत: जाति आधारित भेदभाव के संबंध में मानवाधिकार आयोग को शिकायतें
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत स्थापित एक वैधानिक प्राधिकरण है और इसे लोक सेवकों द्वारा किए गए मानवाधिकार उल्लंघनों के मामलों को उठाने का अधिकार है (Sansa Legal)। कोई भी व्यक्ति NHRC में शिकायत कर सकता है (Sansa Legal)। कोई शुल्क नहीं लिया जाता (Sansa Legal)। शिकायत ऑनलाइन, डाक द्वारा या व्यक्तिगत रूप से की जा सकती है (Sansa Legal)।
कोई समय-सीमा लागू नहीं है (Sansa Legal; iPleaders)। NHRC केवल सिफारिशें कर सकता है (Sansa Legal; iPleaders)। NHRC किसी लोक सेवक के विरुद्ध कार्रवाई कर सकता है (Sansa Legal)।
कार्यस्थल पर जाति भेदभाव की शिकायत
सरकारी सेवा में आरक्षण, भर्ती, पदोन्नति या सेवा की शर्तों से जुड़े मामले NCSC के “सेवा संबंधी मामला” वर्ग में आते हैं (NCSC, ऑनलाइन शिकायत guidelines)। अगर कार्यस्थल पर किसी ने जातिसूचक गाली दी या अपमान किया, तो वही धारा 3(1)(r) और (s) लागू हो सकती हैं, और ऊपर बताई “लोक दृष्टि” की शर्त भी (Hitesh Verma, IndianKanoon; LawWeb)। निजी कंपनी में भर्ती या पदोन्नति के भेदभाव पर हमें कोई अलग कानून नहीं मिला। वकीलों की राय इस पर अलग-अलग हो सकती है, जिसकी हमने जाँच नहीं की। इस पर: कार्यस्थल के आँकड़े और कानून।
बाकी विषयों पर: अस्पृश्यता का अंत, आज छुआछूत की स्थिति, SC वर्ग, ST वर्ग।
शिकायत की प्रक्रिया के सरकारी दस्तावेज़ अंग्रेज़ी में और बिखरे हुए हैं। Ambedkarite Educational Program (AEP) blogging, website बनाना, email marketing, AI tools और Google AI सिखाता है, ताकि ऐसी प्रक्रियाओं का सरल सार स्रोत के साथ अपनी साइट पर रखा जा सके। इसकी फीस एक बार की ₹297 है और access lifetime मिलता है। Free शुरुआत के लिए Movement से जुड़ सकते हो।
निष्कर्ष
जाति भेदभाव की शिकायत कैसे करें, इसका जवाब घटना पर टिका है: अपराध हो तो FIR (नियम 5, BNSS की धारा 173), FIR न हो तो SP और मजिस्ट्रेट, सरकारी सेवा या अधिकारों के मामले हों तो NCSC, और मानवाधिकार उल्लंघन हो तो NHRC। जातिसूचक गाली के लिए “लोक दृष्टि” की शर्त याद रखें। नंबर, पोर्टल और राहत की रकम बदल सकती है। ये कानूनी सलाह नहीं है। अपने मामले में वकील से बात करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
जाति भेदभाव की शिकायत कैसे करें?
अपराध के लिए थाने में FIR, सरकारी सेवा या अधिकारों के मामले में NCSC, और मानवाधिकार उल्लंघन के लिए NHRC। रास्ता घटना की किस्म पर निर्भर है (SC/ST नियम; NCSC; Sansa Legal)।
एससी एसटी एक्ट में एफआईआर कैसे दर्ज करें?
थाना प्रभारी को ज़बानी या लिखित सूचना दें। वो उसे लिखकर आपको पढ़कर सुनाएगा, आपके दस्तखत लेगा और मुफ्त प्रति देगा (SC/ST नियम, नियम 5)।
पुलिस एफआईआर दर्ज न करे तो क्या करें?
सूचना का सार लिखकर डाक से पुलिस अधीक्षक (SP) को भेजें (नियम 5(3)), और BNSS की धारा 173(4) और 175(3) के तहत SP और मजिस्ट्रेट के पास जाएँ (SC/ST नियम; iPleaders)।
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग में शिकायत कैसे करें?
डाक से, toll-free नंबर 1800 11 8888 पर या ऑनलाइन e-GMP पोर्टल (ncsccmis.nic.in) पर, कोई शुल्क नहीं (NCSC, शिकायत guidelines)।
मानवाधिकार आयोग में जाति भेदभाव की शिकायत की समय-सीमा क्या है?
आम तौर पर घटना के एक साल के भीतर, और NHRC की शक्तियाँ सिफारिश की हैं (Sansa Legal; iPleaders)।
SOURCES
- SC/ST (अत्याचार निवारण) नियम, 1995 (tribal.nic.in): https://tribal.nic.in/downloads/acts-and-rules/SCSTpoaact1995.pdf
- SC/ST नियम, 2018 के संशोधन समेत (PDF): https://www.cvmc.in/wp-content/uploads/2023/09/SCST-POA-Rules-1995-English-2018.pdf
- Refworld, SC/ST नियम, 1995: https://www.refworld.org/legal/decreees/natlegbod/1995/96229
- SC/ST अधिनियम का पाठ (tribal.nic.in): https://tribal.nic.in/actRules/SCSTpoaact1989.pdf
- Asha बनाम उत्तर प्रदेश, IndianKanoon: https://indiankanoon.org/doc/42020391/
- Hitesh Verma बनाम उत्तराखंड राज्य, IndianKanoon: https://indiankanoon.org/doc/111507500/
- Allahabad High Court, ILR: https://www2.allahabadhighcourt.in/files_ilr/english/splitted/1313852021_09-01-2023_english.pdf
- Daaman, Hitesh Verma का सार: https://www.daaman.org/jd/hitesh-verma-vs-state-of-uttarakhand/insulting-abusing-sc-st-person-not-an-offence-under-sc-st-act-unless-victim-abused-on-account-of-caste
- LawWeb: https://www.lawweb.in/2025/02/supreme-court-caste-based-abuse-within.html
- Kanoon Mitra, धारा 3(1)(r)(s): https://kanoonmitra.com/%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE-31rs-%E0%A4%8F%E0%A4%B8%E0%A4%B8%E0%A5%80-%E0%A4%8F%E0%A4%B8%E0%A4%9F%E0%A5%80-%E0%A4%8F%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%9F/
- The Legal Bridge: https://thelegalbridge.in/notes/rule-5-duties-vs-section-4-duties/
- NCSC, शिकायत guidelines (PDF): https://ncsccmis.nic.in/Guidelines-for-filing-complaints.pdf
- NCSC, ऑनलाइन शिकायत कैसे करें: https://ncsccmis.nic.in/how_file_complaints.aspx
- Legal Service India: https://www.legalserviceindia.com/legal/article-12814-national-commission-for-scheduled-caste.html
- Wikipedia, NCST: https://en.wikipedia.org/wiki/National_Commission_for_Scheduled_Tribes
- iPleaders, BNSS धारा 173: https://blog.ipleaders.in/how-to-file-an-fir-online-and-offline-under-section-173-bnss/
- Niyam: https://niyam.ai/blog/zero-fir-e-fir-bnss-guide
- ALEC: https://www.alec.co.in/show-blog-page/bnss-2023-first-information-report-under-section-173-registration-obligation-zero-fir-and-anticipatory-bail-interplay
- Sansa Legal, NHRC: https://www.sansalegal.com/post/how-to-file-a-complaint-with-the-nhrc-in-india-process-grounds-and-what-to-expect
- iPleaders, NHRC: https://blog.ipleaders.in/nhrc-complaint/
- LawBeat (22 सितंबर 2026): https://lawbeat.in/top-stories/supreme-court-rejects-challenge-to-2018-amendment-restoring-stringent-scst-act-provisions-1634231
DELIVERY NOTES (पोस्ट के बाहर)
Internal links (8), anchor text, URL और जगह (आज के sitemap से मिलाए हुए slugs):
- अत्याचार निवारण कानून: https://ambedkarite.in/prevention-of-atrocities-act/ (जातिसूचक गाली वाला section)
- गालियों पर कानून: https://ambedkarite.in/caste-slurs/ (उसी section)
- कार्यस्थल के आँकड़े और कानून: https://ambedkarite.in/caste-discrimination-workplace/ (कार्यस्थल वाला section)
- अस्पृश्यता का अंत: https://ambedkarite.in/anuchchhed-17-asprishyata/ (कार्यस्थल section के आखिर में)
- आज छुआछूत की स्थिति: https://ambedkarite.in/does-untouchability-still-exist/ (उसी जगह)
- SC वर्ग और ST वर्ग: https://ambedkarite.in/scheduled-castes/ और https://ambedkarite.in/scheduled-tribes-adivasis/ (उसी जगह)
- Ambedkarite Educational Program और Movement: https://ambedkarite.in/courses/ambedkarite-educational-program/ और https://ambedkarite.in/movement/ (AEP paragraph)
किसी anchor में “जाति”, “भेदभाव”, “की”, “शिकायत”, “कैसे”, “करें”, “एससी”, “एसटी”, “एक्ट”, “में”, “एफआईआर”, “दर्ज”, “राष्ट्रीय”, “अनुसूचित”, “आयोग”, “पुलिस” या “क्या” नहीं है। “SC वर्ग” और “ST वर्ग” में अंग्रेज़ी अक्षर हैं। इस लेख की अपनी English पोस्ट /caste-discrimination-complaint/ है, उस पर link नहीं दिया। हमारे Hindi लेख /karyasthal-par-jati-bhedbhav/ (कार्यस्थल) और /sc-st-act-kya-hai/ (SC/ST एक्ट) पर भी link जोड़ सकते हो। मैंने slug आज के sitemap में जाँचे नहीं (वे अभी publish हुए हैं या नहीं), इसलिए English slugs रखे। External: IndianKanoon के दोनों फैसले (Hitesh Verma और Asha) citation के नाम पर लगाओ, और NCSC की guidelines (ncsccmis.nic.in) और नियम (tribal.nic.in) भी। Lalita Kumari के indiankanoon.org का सीधा link मुझे नहीं मिला। Constitution (legislative.gov.in) पर अनुच्छेद 338 के लिए link लगा सकते हो।
