अनुसूचित जनजाति क्या है? संविधान के अनुच्छेद 366(25) में निर्दिष्ट रूप से, अनुसूचित जनजाति वह जनजाति है जिसे संविधान के अनुच्छेद 342 के तहत राष्ट्रपति द्वारा अधिसूचित किया गया हो (वाजीराम एंड रवि; क्लियरआईएएस)। 2011 की जनगणना के अनुसार, अनुसूचित जनजातियों की संख्या 10.43 करोड़ थी, जो देश की कुल जनसंख्या का 8.6% थी (क्लियरआईएएस)।
वर्तमान में लगभग 705 जनजातियों को अधिसूचित किया गया है (बायजूस; अनंतम आईएएस)। वन अधिकार अधिनियम के कार्यान्वयन से 30 जून 2026 तक लगभग 25.42 लाख आदिवासियों को लाभ हुआ है (कश्मीर लाइफ, लोकसभा उत्तर)। इनके अतिरिक्त, यह लेख आदिवासी की परिभाषा, आदिवासी शब्द पर बहस, संवैधानिक स्थिति और अन्य कानूनी प्रावधानों तथा, यदि कोई हों, तो मामले के अध्ययनों के बारे में भी जानकारी प्रदान करता है।
अनुसूचित जनजाति क्या है: संवैधानिक परिभाषा
अनुच्छेद 342 राष्ट्रपति को यह अधिकार देता है कि वह राज्य के राज्यपाल से परामर्श करने के बाद सार्वजनिक अधिसूचना द्वारा किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की उन जनजातियों को परिभाषित कर सकें, जिन्हें वे उस राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की अनुसूचित जनजातियों में शामिल करना आवश्यक समझते हों (क्लियरआईएएस)। उपर्युक्त परिभाषा के आधार पर राष्ट्रपति प्रत्येक राज्य के लिए अलग अधिसूचना जारी करते हैं (क्लियरआईएएस)। भारत के संविधान के अनुच्छेद 366 (25) के अनुसार, अनुसूचित जनजाति का अर्थ उस संबंधित सूची में शामिल जनजाति है, जो अनुच्छेद 342 के तहत जारी की गई है (वाजीराम एंड रवि)।
संविधान में ‘जनजाति’ शब्द की कोई अलग परिभाषा नहीं है। आदिम विशेषताएँ और पिछड़ापन दो प्रमुख कारक हैं जिन्हें ध्यान में रखा जाता है (अनंतम आईएएस; वाजीराम एंड रवि)। जनजातीय कार्य मंत्रालय का गठन वर्ष 1999 में किया गया था (क्लियरआईएएस)।
अनुसूचित जनजाति की सूची: कितनी जनजातियाँ
बायजूस की वेबसाइट के अनुसार, लगभग 705 अनुसूचित जनजातियाँ हैं, जिन्हें भारत के लगभग 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आगे उप-वर्गीकृत किया गया है। कुछ प्रमुख अनुसूचित जनजातियाँ भील, गोंड और संथाल हैं। लगभग 75 अनुसूचित जनजातियों को ‘’विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह’’ के रूप में जाना जाता है और वे भारत के 18 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में फैले हुए हैं। शहरी क्षेत्रों में रहने वाली अनुसूचित जनजातियों का प्रतिशत लगभग 2.8% है, जैसा कि क्लियरआईएएस द्वारा बताया गया है।
चूंकि सूची राज्यवार है, इसलिए हमारी समझ के अनुसार, कोई विशेष समुदाय किसी राज्य की अनुसूचित जनजाति के रूप में जाना जा सकता है और अन्य राज्यों में ऐसा नहीं भी हो सकता है। हाल के परिवर्तनों और समावेशों के लिए हमारे पास अनुसूचित जनजातियों की नवीनतम सूची उपलब्ध नहीं हो सकती है; आप जनजातीय कार्य मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं। संबंधित श्रेणी: अनुसूचित जाति श्रेणी का विवरण।
आदिवासी कौन हैं: अर्थ और विवाद
‘’आदिवासी’’ का अर्थ ‘’भूमि के मूल निवासी’’ है। यह एक ऐसा पद है जिसे पहली बार 20वीं शताब्दी में गढ़ा गया था और कई अनुसूचित जनजातियाँ इसे मान्यता देती हैं तथा इसका उपयोग करती हैं। भारत के संविधान में ‘’आदिवासी’’ का उल्लेख नहीं है।
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) के अध्यक्ष हर्ष चौहान ने 2023 में कहा कि ‘’आदिवासी’’ या ‘’वनवासी’’ शब्द का भारत के संविधान में उल्लेख नहीं है और ‘’अनुसूचित जनजाति’’ शब्द भारत की संविधान सभा में व्यापक चर्चाओं के बाद गढ़ा गया था (आउटलुक, पीटीआई)। यह बयान राहुल गांधी द्वारा ‘’वनवासी’’ शब्द को ‘’अपमानजनक’’ बताए जाने के बाद दिया गया था (आउटलुक)।
संविधान सभा में “आदिवासी” शब्द की माँग
संविधान सभा में कार्य करते समय जयपाल सिंह मुंडा ने संविधान में “अनुसूचित जनजाति” के बजाय “आदिवासी” शब्द के उपयोग की मांग की थी (विकिपीडिया)। Sociology.Institute के अनुसार, “अनुसूचित जनजाति” शब्द के उपयोग का अर्थ केवल कुछ जनजातियों की मान्यता होगा, और सभी जनजातियों को भूमि के वंशज माना जाना चाहिए।
विकिपीडिया से स्पष्ट है कि संविधान का प्रारूप तैयार करते समय डॉ. आंबेडकर ने कुछ कानूनी शब्दों का उपयोग किया और उस अवधि के सामाजिक-राजनीतिक शब्दों के प्रयोग से बचा। हमने संविधान सभा की कार्यवाहियों से सिंह मुंडा के दावों का सत्यापन नहीं किया है।
दोनों शब्द बराबर नहीं हैं
स्पष्ट रूप से, दोनों शब्द समानार्थी नहीं हैं। बिजॉय (2003) के अनुसार, “अनुसूचित जनजाति” शब्द प्रशासन से संबंधित शब्द है और तथाकथित “आदिवासी” लोगों में से कई स्वयं को इससे संबंधित नहीं मानते (मेनस्ट्रीम वीकली)। पूर्वोत्तर की जनजातियाँ स्वयं को इस क्षेत्र की “स्वदेशी जनजातियाँ” कहना पसंद करती हैं (विकिपीडिया)।
पूर्वोत्तर और उत्तर बंगाल क्षेत्रों में चाय बागान हैं और उन बागानों में कई जनजातीय लोग कार्यरत हैं, तथा उन्हें भी “आदिवासी” माना जाता है (इंडियन ट्राइबल हेरिटेज)। भारत ने 2007 में स्वदेशी लोगों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र घोषणा के पक्ष में मतदान किया, लेकिन कहा कि सभी भारतीय स्वदेशी लोग हैं (विकिपीडिया)। बिरसा मुंडा के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहाँ देखें।
2011 की जनगणना: यहाँ।
भारत की 2011 की जनगणना के अनुसार, अनुसूचित जनजातियों की संख्या 10.43 करोड़ (8.6%) थी (क्लियरआईएएस)। अकेले मध्य प्रदेश में लगभग 1.53 करोड़ अनुसूचित जनजातियाँ हैं (विकिपीडिया, ट्राइबल्स ऑफ मध्य प्रदेश)। यह आंकड़ा 2011 का है और नवीनतम आंकड़ों की प्रतीक्षा है। नवीनतम आंकड़ों के लिए यहाँ देखें। जनगणना के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहाँ देखें।
आदिवासी अधिकार: संविधान और कानून
पाँचवीं अनुसूची: मुख्यभूमि भारत में जनजातीय क्षेत्र
असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम के अलावा अन्य राज्यों में जनजातीय क्षेत्रों का प्रशासन पाँचवीं अनुसूची में निर्दिष्ट है (मॉडल डिप्लोमैट)। वर्तमान में अनुसूचित क्षेत्र दस राज्यों में पाए जाते हैं, अर्थात् आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और राजस्थान (मॉडल डिप्लोमैट)।
इनमें से प्रत्येक राज्य में 20 से अधिक सदस्यों वाली जनजाति सलाहकार परिषद होती है, जिनमें से कम से कम तीन-चौथाई सदस्य विधान सभा में अनुसूचित जनजातियों के प्रतिनिधि होते हैं (मॉडल डिप्लोमैट)। राज्यपाल, परिषद से परामर्श के बाद, उक्त क्षेत्रों के लिए नियम बनाने के लिए अधिकृत हैं और ऐसे नियम, जब राष्ट्रपति द्वारा अनुमोदित कर दिए जाते हैं, तो कानून का बल रखते हैं (लिगेसीआईएएस)। हालांकि, परिषद के पास ऐसे नियमों को लागू करने की शक्ति नहीं है (लिगेसीआईएएस)।
छठी अनुसूची और पेसा अधिनियम
छठी अनुसूची (अनुच्छेद 244(2)) असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों में स्वायत्त जिला परिषदों की स्थापना का प्रावधान करती है (मॉडल डिप्लोमैट)। 1996 में पाँचवीं अनुसूची वाले क्षेत्रों में ग्राम सभाओं सहित ग्रामीण स्थानीय निकायों को सशक्त बनाने के लिए पेसा अधिनियम बनाया गया था (विकिपीडिया, पेसा अधिनियम)। पेसा अधिनियम के अनुसार, पाँचवीं अनुसूची वाले क्षेत्रों से संबंधित निर्णयों में ग्राम सभाओं के पास पर्याप्त अधिकार हैं (अनंतम आईएएस)।
वन अधिकार अधिनियम: कार्यान्वयन की स्थिति
वन अधिकार अधिनियम, 2006 का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जनजातियों और अन्य पारंपरिक वनवासियों के 13 अलग-अलग अधिकारों को मान्यता देना है (डाउन टू अर्थ)। ये अधिकार भूमि, जल, वनों, वनस्पतियों और जीव-जंतुओं तथा अन्य प्राकृतिक संसाधनों से संबंधित हैं (द वायर)। ये अधिकार केवल किसी मान्यता प्राप्त वनवासी समुदाय के सदस्यों तक सीमित हैं और इनका प्रयोग 4 हेक्टेयर वन भूमि के भीतर किया जाना है (LegacyIAS, PIB का हवाला देते हुए)।
30 जून 2026 के आँकड़े
30 जून, 2026 तक सरकार द्वारा पूरे भारत में कुल 2,542,359 पट्टे प्रदान किए गए। इस कुल संख्या में से 2,418,197 पट्टे व्यक्तियों को वितरित किए गए और 124,162 पट्टे समुदायों को दिए गए (कश्मीर लाइफ, लोकसभा का उत्तर)। इसी अवधि में 1,813,232 दावे खारिज किए गए, जबकि 1,045,970 दावे अभी भी लंबित हैं (कश्मीर लाइफ, राज्यसभा का उत्तर)।
यह मानते हुए कि शेष दावे भी खारिज कर दिए गए, दावों की कुल संख्या लगभग 5.4 मिलियन होगी। इसकी गणना वर्तमान लेखक द्वारा की गई है। जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा लोकसभा में दिए गए उत्तर (कश्मीर लाइफ) में कहा गया कि अधिनियम के प्रावधानों को लागू करना राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है। अधिनियम की धारा 4(5) में निर्दिष्ट है कि दावों की प्रक्रिया लंबित रहने के दौरान किसी व्यक्ति को बेदखल नहीं किया जा सकता (ग्रेटर कश्मीर, भारत सरकार का मंत्रालय)।
Wildlife First मामला
Wildlife First (2019) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य को उन वनवासियों के संबंध में बेदखली की प्रक्रिया लागू करने का निर्देश दिया, जिनके दावे खारिज कर दिए गए थे। इस संबंध में उत्तराखंड राज्य ने स्थगन आदेश के लिए अपील की, जिसे बाद में 28 फरवरी, 2019 को मंजूर कर लिया गया (SC Observer)। इस संबंध में कई संरक्षण संस्थाओं ने आरोप लगाया है कि अनुसूचित जनजाति और अन्य वनवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 असंवैधानिक है (SC Observer)।
दोनों पक्षों की दलीलें
संरक्षण समूह चेतावनी देते हैं कि सामुदायिक वन अधिकार प्रदान करने से शोषण और वनों की कटाई हो सकती है। हालांकि, 109 संगठनों सहित अन्य लोगों ने सामुदायिक वन अधिकारों के दावों की निष्पक्ष समीक्षा की मांग की है, क्योंकि इनमें से कई दावों को मनमाने ढंग से खारिज कर दिया गया है। 23 अक्टूबर, 2026 को जनजातीय कार्य मंत्रालय ने अधिनियम की समीक्षा के तहत श्रीनगर में तीन क्षेत्रीय परामर्शों में से अंतिम परामर्श आयोजित किया (Legacy IAS, PIB का हवाला देते हुए)।
ज़मीन पर अदालती फैसले
न्यायिक विकास: 11 जुलाई, 1997 को सर्वोच्च न्यायालय ने Samatha मामले में फैसला सुनाया कि अनुसूचित क्षेत्रों में किसी भी गैर-आदिवासी व्यक्ति को किसी भी प्रकार के खनन के लिए आदिवासी भूमि पर किसी भी प्रकार की पट्टा प्राप्त करने का अधिकार नहीं है (InforMEA)।
नियमगिरि क्षेत्र की ग्राम सभा ने 2004 और 2013 के बीच प्रस्तावों की एक श्रृंखला के माध्यम से किसी भी प्रकार के खनन के लिए अपने वनों को हटाने की अनुमति देने की अनिच्छा व्यक्त की, जिससे ओडिशा माइनिंग कॉरपोरेशन (OMC) को वन अधिकार प्रदान किए जाने पर रोक लग गई। 18 अप्रैल, 2013 को सर्वोच्च न्यायालय ने घोषित किया कि ग्राम सभा की सिफारिशों के आधार पर समुदाय के वन अधिकारों के दावे को अधिकृत किया जाएगा और उसके बाद ही OMC खनन पर निर्णय ले सकता है (एमनेस्टी इंटरनेशनल)।
आदिवासी अधिकार: संविधान, आरक्षण और राजनीतिक व्यवस्था
आदिवासी अधिकार कई परतों में हैं: पाँचवीं और छठी अनुसूची, PESA, वन अधिकार अधिनियम, और नौकरी-शिक्षा में आरक्षण। केंद्र की सीधी भर्ती में अनुसूचित जनजाति के लिए 7.5% पद आरक्षित हैं (DoPT Master Circular, अगस्त 2026)। आरक्षण का पूरा ब्योरा: आरक्षण का पूरा ब्योरा। विधायिका में सीटों का आरक्षण भी है (Model Diplomat)।
संविधान सभा में जयपाल सिंह मुंडा, जो Oxford से पढ़े थे और भारत की हॉकी टीम को ओलंपिक स्वर्ण दिलाने वाले कप्तान थे, ने गांधीवादी सदस्यों जैसे ए.वी. ठक्कर के “सामाजिक उत्थान” वाले नज़रिए को खारिज किया और आदिवासियों के ज़मीन पर पहले अधिकार का दावा रखा (Sociology.Institute)। उन्होंने सभा में आदिवासी महिलाओं की गैरमौजूदगी और जनजातीय प्रतिनिधित्व की कमी पर भी सवाल उठाया (Sociology.Institute)। सभा की कहानी: संविधान सभा का पूरा ब्योरा।
आदिवासी विषयों पर Hindi में स्रोत वाली सामग्री कम मिलती है, जबकि आँकड़े संसद के जवाबों में सार्वजनिक हैं। Ambedkarite Educational Program (AEP) blogging, website बनाना, email marketing, AI tools और Google AI सिखाता है, ताकि इन जवाबों का सार अपनी साइट पर स्रोत के साथ रखा जा सके। इसकी फीस एक बार की ₹297 है और access lifetime मिलता है। Free शुरुआत के लिए Movement से जुड़ सकते हो।
निष्कर्ष
अनुसूचित जनजाति क्या है, इसका सीधा जवाब है: अनुच्छेद 342 के तहत राष्ट्रपति से अधिसूचित जनजातियाँ, जिनकी सूची राज्य-वार है और जिनकी संख्या करीब 705 है। “आदिवासी” एक पहचान का शब्द है, जो संविधान में नहीं है और जिस पर राजनीतिक बहस भी है। पाँचवीं और छठी अनुसूची, PESA और वन अधिकार अधिनियम अधिकार देते हैं, पर 30 जून 2026 तक 10.46 लाख दावे लंबित थे और 18.13 लाख खारिज हुए। 2019 का बेदखली का आदेश रुका हुआ है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अनुसूचित जनजाति क्या है?
अनुच्छेद 342 के तहत राष्ट्रपति से अधिसूचित जनजातियाँ। अनुच्छेद 366(25) के अनुसार वही अनुसूचित जनजाति हैं (Vajiram and Ravi; ClearIAS)।
आदिवासी कौन हैं?
“आदिवासी” का मतलब “प्राचीन निवासी” है। कई अनुसूचित जनजातियाँ इसे अपनी पहचान के रूप में अपनाती हैं, पर ये संविधान का शब्द नहीं है (Wikipedia; Outlook, PTI)।
अनुसूचित जनजाति की सूची में कितनी जनजातियाँ हैं?
करीब 705 जनजातियाँ करीब 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अधिसूचित हैं (BYJU’S; Anantam IAS)।
आदिवासी अधिकार कौन से हैं?
संविधान की पाँचवीं और छठी अनुसूची, PESA 1996, वन अधिकार अधिनियम 2006 और आरक्षण (Model Diplomat; Wikipedia; Down To Earth; DoPT Master Circular)।
वन अधिकार अधिनियम क्या है और कितने दावे मंज़ूर हुए?
2006 का कानून जो वनवासियों के 13 तरह के अधिकार मानता है। 30 जून 2026 तक 25,42,359 titles बाँटे गए (Down To Earth; Kashmir Life)।
SOURCES
- ClearIAS: https://www.clearias.com/major-tribes-in-india/
- Vajiram and Ravi: https://vajiramandravi.com/current-affairs/scheduled-tribes/
- BYJU’S: https://byjus.com/free-ias-prep/scheduled-tribes/
- Anantam IAS, Tribes of India: https://anantamias.com/tribes-of-india/
- Wikipedia, Adivasi: https://en.wikipedia.org/wiki/Adivasi
- Outlook (PTI): https://www.outlookindia.com/national/adivasi-vs-vanvasi-constitution-uses-scheduled-tribes-for-tribals-debates-futile-says-ncst-chairperson-news-240240
- Sociology.Institute: https://sociology.institute/sociology-in-india/tribal-rights-constituent-assembly-debates-india/
- Mainstream Weekly: https://www.mainstreamweekly.net/article1537.html
- Indian Tribal Heritage: https://indiantribalheritage.org/more-than-a-question-of-terminology-adivasi-indigenous-peoples-of-india-vanvasi-vanyajati-and-the-administration-of-constitutional-privileges-for-scheduled/
- Wikipedia, Tribals in Madhya Pradesh: https://en.wikipedia.org/wiki/Tribals_in_Madhya_Pradesh
- Model Diplomat, Fifth Schedule: https://modeldiplomat.com/learn/glossary/fifth-schedule
- LegacyIAS, Fifth and Sixth Schedule: https://www.legacyias.com/governance-fifth-sixth-schedule-areas/
- Wikipedia, PESA Act: https://en.wikipedia.org/wiki/PESA_Act
- Anantam IAS, PESA: https://anantamias.com/pesa-act/
- Kashmir Life (लोकसभा का जवाब): https://kashmirlife.net/jammu-kashmir-has-distributed-6020-forest-rights-titles-under-fra-lok-sabha-told-444523/
- Kashmir Life (राज्यसभा का जवाब): https://kashmirlife.net/only-6020-titles-distributed-against-46090-fra-claims-in-jammu-kashmir-rajya-sabha-told-447700/
- Greater Kashmir: https://m.greaterkashmir.com/article/over-39000-forest-right-claims-rejected-in-jk-since-2020-goi/417305
- Down To Earth (2025): https://www.downtoearth.org.in/governance/ahead-of-crucial-hearing-forest-rights-organisations-demand-fair-review-of-fra-rejections
- Down To Earth (संरक्षण समूह): https://www.downtoearth.org.in/forests/how-the-supreme-court-order-on-forest-rights-act-impacts-its-implementation-and-forest-dependent-communities
- SC Observer: https://www.scobserver.in/cases/constitutionality-of-the-frawildlife-first-v-ministry-of-forest-and-environment-eviction-of-forest-dwellers-background/
- The Wire: https://science.thewire.in/politics/government/supreme-court-forest-rights-eviction/
- LegacyIAS, PIB summary (24 अक्टूबर 2026): https://www.legacyias.com/pib-summaries-24-october-2026/
- InforMEA, Samatha: https://www.informea.org/en/court-decision/samatha-vs-state-ap-and-ors
- Wikipedia, Orissa Mining Corporation v. MoEF: https://en.wikipedia.org/wiki/Orissa_Mining_Corporation_v._Ministry_of_Environment_and_Forest_and_Others
- Amnesty International: https://www.amnesty.org/ar/wp-content/uploads/2021/06/pre011862013en.pdf
- DoPT Master Circular (StaffNews): https://www.staffnews.in/2026/08/reservation-in-posts-and-services-in-the-central-government-dopt-master-circular.html

