Poster-style graphic comparing Peshwa vs British rule: was it a golden age? What sources say | पेशवा शासन बनाम अंग्रेज़ी राज: क्या सच में स्वर्ण युग था? सबूतों पर पोस्टर स्टाइल ग्राफिक
पेशवा शासन की बहस में दोनों तरफ़ वालों का तर्क एक फ़ैक्ट से टूट जाता है 👇
सच बोलूं तो कोई भी दौर सबके लिए सुनहरा नहीं था। एक स्टैंडर्ड reference पेशवा काल के प्रशासन को revenue, सेवाओं और कानून-व्यवस्था में असली सुधार का श्रेय देता है (Encyclopedia of India, “Peshwai and Pentarchy”)। फिर भी वही राज्य जाति के मामलों में सीधे शामिल था (Fukazawa, 1968)।
दावा: पेशवा शासन स्वर्ण युग था, फिर अंग्रेज़ों ने सब बर्बाद किया
सामने वाले का सबसे मज़बूत तर्क पहले सुन। ये पेशवा स्वर्ण युग वाले दावे का सबसे अच्छा रूप है। उसी reference के मुताबिक मराठे, खासकर पेशवाओं के समय, अंग्रेज़ी विजय से पहले भारत की बड़ी हिंदू शक्ति थे (Encyclopedia of India, “Peshwai and Pentarchy”)। नानासाहेब पेशवा के दौर में revenue वसूली, सेवाओं और कानून-व्यवस्था में आम सुधार दर्ज है (Encyclopedia of India, “Peshwai and Pentarchy”)। माधवराव प्रथम को स्थिर revenue, जनकल्याण के कार्यक्रमों और मराठा न्याय-व्यवस्था के सम्मान का श्रेय मिलता है (Encyclopedia of India, “Peshwai and Pentarchy”)।
फिर आता है सबसे तेज़ पत्ता: खुद बाबासाहेब। 1943 के रानाडे वाले भाषण में उन्होंने कहा कि मराठा साम्राज्य के गिरने पर महाराष्ट्र के ज़्यादातर लोग स्तब्ध थे (BAWS Vol 1, Ranade, Gandhi and Jinnah)। उन्होंने मराठों को ऐसी जुझारू कौम भी बताया जो आज़ादी का मतलब जानती थी (BAWS Vol 1, Ranade, Gandhi and Jinnah)। तो दावा बनता है: बाबासाहेब ने भी पतन का शोक किया। ये कोट करना जायज़ है, इसलिए बाकी हिस्सा भी पढ़ लेते हैं।
पेशवा शासन के स्वर्ण युग वाले दावे की पोल
पहला, उसी अंश का दूसरा हिस्सा पढ़। बाबासाहेब कहते हैं कि कुछ लोग “ब्राह्मण पेशवा के शापित राज” के अंत से खुश थे (मूल अंग्रेज़ी: “cursed rule of the Brahmin Peshwa”) (BAWS Vol 1, Ranade, Gandhi and Jinnah)। फिर भी छपे हुए भाषण में वो पेशवा काल को कहीं सुनहरा नहीं कहते (BAWS Vol 1, Ranade, Gandhi and Jinnah)। बस वो पतन के सदमे की बात करते हैं, और सदमा राज की तारीफ़ से अलग चीज़ है।
दूसरा, सुनहरा किसके लिए? बाबासाहेब ने पेशवाओं के राज में अछूतों के लिए सड़क पर रोक और काले धागे का नियम दर्ज किया (BAWS Vol 1, Annihilation of Caste)। मटके और झाड़ू वाली डिटेल विवादित हैं, जो हमारे पेशवा कौन थे लेख में समझाई हैं। फिर भी राज्य की भूमिका दर्ज है, क्योंकि 1968 के एक अध्ययन के मुताबिक मराठा राज्य जाति के मामलों के अंदर बैठा था (Fukazawa, 1968)।
तीसरा, पेशवा काल की न्याय-व्यवस्था देख। जज रामशास्त्री प्रभुणे ने रघुनाथराव के पद के दावे को अवैध ठहराया, और उनका नाम आज भी महाराष्ट्र में ईमानदारी का पर्याय है (Encyclopedia of India, “Peshwai and Pentarchy”)। दोनों बातें सच हो सकती हैं। एक मामले में ईमानदार जज होना उन नियमों को नहीं मिटाता, जो इंसान को जन्म से छाँटते थे (Fukazawa, 1968)।
चौथा, “अंग्रेज़ों ने बर्बाद किया” वाली लाइन पेशवा राज्य का अपना हिस्सा छोड़ देती है। 1756 में नानासाहेब ने आंग्रे की नौसेना खत्म करने के लिए कंपनी की मदद ली, और इससे समुद्र अंग्रेज़ों के लिए खुल गया (Encyclopedia of India, “Peshwai and Pentarchy”)। 1802 में बाजीराव द्वितीय ने बसीन की संधि पर दस्तखत किए, जिसने पेशवाई को लगभग खत्म कर दिया (Encyclopedia of India, “Peshwai and Pentarchy”)। उससे भी पहले 1761 में पानीपत ने मराठों के एक लाख से ज़्यादा लोग छीन लिए (Encyclopedia of India, “Peshwai and Pentarchy”)।
तब और अब: सबूतों की तालिका
पेशवा शासन और अंग्रेज़ी राज को पंक्ति-दर-पंक्ति देख। हर पंक्ति में सोर्स वाला फ़ैक्ट है, और जिसका सोर्स नहीं मिला, वो पंक्ति यहाँ है ही नहीं (Encyclopedia of India; BAWS Vol 1; PARI summary of BAWS Vol 12)।
सवाल
पेशवा काल
अंग्रेज़ी राज
स्रोत
राज किसका था?
भट परिवार के वंशानुगत पेशवा, 1749 के बाद असल शासक
ईस्ट इंडिया कंपनी, 1818 में बाजीराव द्वितीय को हटाने के बाद
पेशवा बनाम अंग्रेज़: अंग्रेज़ी राज भी मसीहा नहीं था
बाबासाहेब के BAWS Vol 12 के नोट्स के मुताबिक कंपनी की नीतियों ने भारत के उद्योग तबाह किए और ज़मीन-राजस्व कानूनों ने खेती बर्बाद की (PARI summary of BAWS Vol 12)। महारों के लिए नुकसान निजी था। बाबासाहेब ने लिखा कि महार अफ़सरों ने 1892 के उन आदेशों के खिलाफ़ अर्ज़ी दी, जिनसे सेना में महारों की भर्ती बंद हुई (BAWS Vol 1, Ranade, Gandhi and Jinnah)। साथ ही आनंद तेलतुंबड़े को ऐसा कोई सबूत नहीं मिला कि पेशवाई गिरने के बाद महारों को राहत मिली (The Wire, 2018)।
फुले ने भी ब्रिटिश प्रशासन पर हमला किया, जिसे वो यूरोपीय और ब्राह्मण अफ़सरों से भरा हुआ मानते थे (O’Hanlon, Caste, Conflict and Ideology)। तो ईमानदार तस्वीर दो असमान सिस्टम की है, एक सुनहरे दौर और एक मसीहा की नहीं। कोरेगांव वाला पहलू जानना हो तो हमारा भीमा कोरेगांव की लड़ाई पढ़।
पेशवा शासन का स्वर्ण युग वाला मिथ बार-बार क्यों लौटता है
सुनहरा दौर एक आरामदायक कहानी है। ये हर नुकसान का दोष बाहर वालों पर डालती है और पुणे के अंदर की लड़ाइयाँ छोड़ देती है (Encyclopedia of India, “Peshwai and Pentarchy”)। ये जाति को भी छोड़ देती है, जिसमें राज्य का अपना हाथ था (Fukazawa, 1968)।
पर उलटी कहानी भी उतनी ही आलसी है। अंग्रेज़ों को शुद्ध मसीहा बताना कंपनी के नुकसान को नज़रअंदाज़ करता है (PARI summary of BAWS Vol 12)। सुन, receipts तभी चलते हैं जब लोग उन्हें ढूँढ़ पाएँ, और सोर्स वाला पेज forward किए screenshot से ज़्यादा भारी पड़ता है। (इसी के लिए Ambedkarite Educational Program अंबेडकराइट्स को तैयार करता है: Blogging & SEO, Website Building और Google AI।)
निचोड़
पेशवा शासन की कहानी में कोई साफ़ हीरो नहीं है। पेशवा काल के प्रशासन में असली सुधार थे, पर राज्य जाति के मामलों में भी शामिल था (Encyclopedia of India; Fukazawa, 1968)। अंग्रेज़ी राज ने अपना आर्थिक और जातिगत नुकसान किया (PARI summary of BAWS Vol 12; BAWS Vol 1, Ranade, Gandhi and Jinnah)। अगली बार कोई पेशवा स्वर्ण युग वाली पोस्ट शेयर करे, तो दोनों कॉलम पढ़ ले।
बाबासाहेब ने तीन शब्द दिए: Educate. Agitate. Organize.
ये blog पढ़ना “Educate” था। Agitate और Organize तब शुरू होते हैं जब तू सीखा हुआ publish करता है।
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पेशवा शासन अच्छा था या बुरा? मिला-जुला था। एक reference पेशवा काल के प्रशासन को revenue, सेवाओं और कानून-व्यवस्था में सुधार का श्रेय देता है (Encyclopedia of India, “Peshwai and Pentarchy”)। उसी राज्य ने जाति के मामलों में भी हिस्सा लिया (Fukazawa, 1968)।
पेशवा बनाम अंग्रेज़: कौन सा राज बेहतर था? सोर्स कोई साफ़ विजेता नहीं देते। बाबासाहेब ने लिखा कि कंपनी की नीतियों ने उद्योग और खेती को नुकसान पहुँचाया (PARI summary of BAWS Vol 12)। उन्होंने पेशवाओं के राज के जाति-नियम भी दर्ज किए (BAWS Vol 1, Annihilation of Caste)।
क्या अंग्रेज़ों ने पेशवाओं को बर्बाद किया? गिरावट पहले शुरू हो चुकी थी। 1761 के पानीपत में मराठों ने एक लाख से ज़्यादा लोग खोए, और बाजीराव द्वितीय 1818 में पद से हटाए गए (Encyclopedia of India, “Peshwai and Pentarchy”)।
क्या अंबेडकर ने पेशवा राज को स्वर्ण युग कहा? 1943 के छपे रानाडे भाषण में नहीं। वो कुछ लोगों को पेशवा राज के अंत से खुश और ज़्यादातर लोगों को स्तब्ध बताते हैं (BAWS Vol 1, Ranade, Gandhi and Jinnah)।
पेशवा काल कब खत्म हुआ? लगभग 1713 से 1818 तक चला, और बाजीराव द्वितीय को हटाने के साथ खत्म हुआ (Encyclopedia of India, “Peshwai and Pentarchy”)।
आगे पढ़ने के लिए (स्रोत 1 की bibliography में, इस लेख के लिए पढ़ी नहीं): B. G. Gokhale, Poona in the Eighteenth Century (OUP, 1988); V. T. Gune, The Judicial System of the Marathas (1953)
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