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Poster-style graphic on Ambedkar 22 vows: the 14 October 1956 Nagpur ceremony and the full list | बाबासाहेब की 22 प्रतिज्ञाएँ: 14 अक्टूबर 1956 का नागपुर समारोह और पूरी सूची, नेवी-ब्लू पोस्टर ग्राफिक

बाबासाहेब की 22 प्रतिज्ञाएँ: पूरी सूची, मतलब और संदर्भ

बाबासाहेब की 22 प्रतिज्ञाएँ छोटी और सीधी हैं, पर ज़्यादातर लोगों ने इन्हें सिर्फ़ पोस्टर पर देखा है। यहाँ ये क्रम से हैं 👇

14 अक्टूबर 1956 को नागपुर में बाबासाहेब और उनके अनुयायियों ने त्रिशरण और पंचशील के बाद ये 22 प्रतिज्ञाएँ लीं (The Telegraph, 2022)। ये पोस्ट बताती है कि प्रतिज्ञाओं में क्या लिखा है और उन्होंने इन्हें क्यों दिया। ये पोस्ट किसी धर्म पर फ़ैसला नहीं सुनाती और किसी समुदाय को निशाना नहीं बनाती।

बाबासाहेब की 22 प्रतिज्ञाएँ: ये क्या हैं और कब ली गईं

बाबासाहेब ने 13 अक्टूबर 1935 को येवला में कहा कि वो हिंदू धर्म छोड़ देंगे। वहाँ उन्होंने सम्मेलन से कहा: “मैं आपको गंभीरता से भरोसा दिलाता हूँ कि मैं हिंदू के रूप में नहीं मरूँगा” (मूल अंग्रेज़ी: “I solemnly assure you that I will not die a Hindu”) (The Caravan)। अगले दो दशकों में उन्होंने दलितों से हिंदू धर्म छोड़ने की अपील की और कई धर्मों का अध्ययन किया (The Caravan)। 23 सितंबर 1956 को उन्होंने ऐलान किया कि वो उसी साल दशहरे पर धर्मांतरण करेंगे (The Caravan)।

समारोह 14 अक्टूबर 1956 को नागपुर में हुआ, जो उस साल अशोक विजयादशमी थी (The Telegraph, 2022)। पहले बाबासाहेब को महास्थविर चंद्रमणि ने दीक्षा दी, और फिर उन्होंने अपने अनुयायियों को दीक्षा दी (The Caravan)। दूसरा समारोह 16 अक्टूबर 1956 को चंद्रपुर में हुआ (Round Table India)।

दिसंबर में मुंबई समेत और भी समारोह तय थे, पर बाबासाहेब का 6 दिसंबर 1956 को निधन हो गया (Round Table India)। संख्याओं पर सोर्स अलग-अलग हैं। The Caravan के मुताबिक लगभग पाँच लाख लोगों ने धर्मांतरण किया, जबकि Round Table India का एक और लेख 8 लाख बताता है (Round Table India की सूची वाला लेख)। इसलिए कोई भी एक संख्या सँभलकर इस्तेमाल कर।

बाबासाहेब ने बौद्ध धम्म क्यों चुना

The Caravan के मुताबिक उन्होंने बौद्ध धम्म इसलिए चुना क्योंकि वो भारत की अपनी परंपरा से निकला है, तर्कसंगत है और सामाजिक समानता के लिए प्रतिबद्ध है (The Caravan)। उन्होंने बताया कि नागपुर इसलिए चुना क्योंकि शहर का नाम नाग लोगों पर है, जिन्होंने बुद्ध की शिक्षाएँ फैलाईं, इसलिए नहीं कि वहाँ कोई संगठन है (The Caravan)। 14 अक्टूबर इसलिए चुना गया क्योंकि उस साल वो अशोक विजयादशमी थी (The Telegraph, 2022)।

इस फ़ैसले की जड़ उनके पुराने काम में है। उन्होंने 1916 में लिखा कि जाति मनु से बहुत पहले की है, और मनु ने मौजूद नियमों को संहिता में लिखा (BAWS Vol 1, p. 16)। इसे हमारी पोस्ट अंबेडकर कास्ट्स इन इंडिया में पढ़ सकते हैं। 1936 में उन्होंने कहा कि जाति श्रम का बँटवारा नहीं, श्रमिकों का बँटवारा है (BAWS Vol 1, editors’ introduction, p. xiv), जिसे हमारा जाति का विनाश explainer समझाता है।

22 प्रतिज्ञाओं की सूची, सरल शब्दों में

प्रतिज्ञाओं के छपे अंग्रेज़ी पाठ शब्दों में और कुछ जगह क्रम में अलग हैं। The Telegraph के मुताबिक पाठ अलग-अलग reproductions में बदलता है, शायद मूल से अनुवाद की वजह से (The Telegraph, 2022)। इसलिए मैंने हर प्रतिज्ञा अपने शब्दों में लिखी है, जो Round Table India की सूची पर आधारित है। कोट करते वक़्त सही पाठ डॉ. अंबेडकर फ़ाउंडेशन के volume से मिला लें।

प्रतिज्ञा 1 से 5: ईश्वर और अवतार पर आस्था

  1. ब्रह्मा, विष्णु और महेश में आस्था न रखना और उनकी पूजा न करना (Round Table India)।
  2. राम और कृष्ण के लिए भी यही, जिन्हें अवतार माना जाता है (Round Table India)।
  3. गौरी, गणपति और हिंदुओं के बाकी देवी-देवताओं के लिए भी यही (Round Table India)।
  4. ईश्वर के अवतार में विश्वास न करना (Round Table India)।
  5. ये न मानना कि बुद्ध विष्णु के अवतार थे, जिसे प्रतिज्ञा झूठा प्रचार कहती है (Round Table India)।

ये पाँचों प्रतिज्ञाएँ बताती हैं कि धर्मांतरण करने वाला क्या नहीं मानेगा और किसकी पूजा नहीं करेगा। ये नया धर्म अपनाते वक़्त ली गई प्रतिबद्धता है, और ये पोस्ट इन्हें उसी रूप में बताती है।

प्रतिज्ञा 6 से 8: कर्मकांड

  1. श्राद्ध न करना और पिंडदान न देना (Round Table India)।
  2. बुद्ध के सिद्धांतों और शिक्षाओं के ख़िलाफ़ काम न करना (Round Table India)।
  3. ब्राह्मणों से कोई संस्कार न करवाना (Round Table India)।

प्रतिज्ञा 9 और 10: समानता

  1. मनुष्य की समानता में विश्वास रखना (Round Table India)।
  2. समानता स्थापित करने की कोशिश करना (Round Table India)।

ये दोनों 1927 में महाड़ के स्वयंसेवकों की शपथ की याद दिलाती हैं, जिसमें जाति-भेद और अस्पृश्यता को ठुकराया गया था (SabrangIndia, 2017)। उस घटना पर हमारी पोस्ट मनुस्मृति दहन दिवस देख।

प्रतिज्ञा 11 से 18: बौद्ध मार्ग और रोज़मर्रा का आचरण

  1. बुद्ध के आर्य अष्टांगिक मार्ग पर चलना (Round Table India)।
  2. बुद्ध की बताई पारमिताओं का पालन करना (Round Table India)।
  3. सभी प्राणियों के लिए करुणा और मैत्री रखना और उनकी रक्षा करना (Round Table India)।
  4. चोरी न करना (Round Table India)।
  5. झूठ न बोलना (Round Table India)।
  6. कामुक दुराचार न करना (Round Table India)।
  7. शराब और नशीली चीज़ें न लेना (Round Table India)।
  8. रोज़ की ज़िंदगी में अष्टांगिक मार्ग और करुणा का अभ्यास करना (Round Table India)।

प्रतिज्ञा 14 से 17 पंचशील के नियमों जैसी हैं, और क्रम अलग-अलग सूचियों में अलग है। इस सूची में प्रतिज्ञा 11 और 18 दोनों अष्टांगिक मार्ग की बात करती हैं, और यही उन जगहों में से एक है जहाँ छपे पाठ अलग हैं।

प्रतिज्ञा 19 से 22: घोषणा

  1. हिंदू धर्म को छोड़ना और बौद्ध धम्म अपनाना, और इसकी वजह असमानता बताना (Round Table India)।
  2. ये पक्का मानना कि बुद्ध का धम्म ही एकमात्र सच्चा धर्म है (Round Table India)।
  3. ये मानना कि धर्मांतरण करने वाले का पुनर्जन्म हो रहा है (Round Table India)।
  4. आज से बुद्ध और उनके धम्म के सिद्धांतों और शिक्षाओं के अनुसार जीवन जीना (Round Table India)।

प्रतिज्ञा 19 अपनी वजह खुद बताती है: वो कहती है कि हिंदू धर्म असमानता पर टिका है (Round Table India)। ये पोस्ट इसे शपथ के पाठ के तौर पर बताती है, किसी बहस में पक्ष नहीं लेती।

बाबासाहेब की 22 प्रतिज्ञाएँ कहाँ से आती हैं

The Telegraph के मुताबिक समारोह का ब्योरा BAWS Vol 17, Part III में है, अध्याय “The Buddha Dhamma will be the saviour of the world” में (The Telegraph, 2022)। एक श्रीलंकाई बौद्ध पत्र के मुताबिक बाबासाहेब ने ये प्रतिज्ञाएँ ख़ास धर्मांतरण के लिए तैयार कीं, और भारत में ये धर्मांतरण की विधि का हिस्सा बन गईं (Budusarana, 2007)।

Dhamma Bharat का कहना है कि पहली तीन प्रतिज्ञाएँ बाबासाहेब की अपनी हस्तलिपि में मराठी में बची हैं (Dhamma Bharat)। उस हस्तलिखित पन्ने की मैं खुद पुष्टि नहीं कर पाया। इस साइट पर हवाले देने के लिए पोस्टर की जगह डॉ. अंबेडकर फ़ाउंडेशन का volume दिखाएँ।

बाबासाहेब की 22 प्रतिज्ञाएँ क्या हैं और क्या नहीं

ये उन लोगों की निजी प्रतिज्ञाएँ हैं जो बौद्ध धम्म अपना रहे हैं। Round Table India के मुताबिक बाबासाहेब ने सिर्फ़ उन लोगों से अपील की जो इन्हें अपनी मर्ज़ी से स्वीकार करके पूरी निष्ठा से निभा सकें (Round Table India का धर्मांतरण वाला लेख)। ये कानून नहीं हैं, और बौद्ध समुदाय के बाहर किसी पर लागू नहीं होतीं।

लोग इन्हें अलग-अलग तरह से पढ़ते हैं। Janata Weekly के एक लेखक का तर्क है कि ये किसी भी तरह हिंदू-विरोधी नहीं हैं, बल्कि बौद्धों के लिए दिशा-निर्देश हैं, जैसे हर धर्म देता है (Janata Weekly)। वही लेखक पहली दो प्रतिज्ञाओं को देवताओं के नाम पर हो रहे शोषण से दलितों को आज़ाद करने से जोड़ता है (Janata Weekly)। इन पाठों को कितना वज़न देना है, ये पाठक खुद तय करें।

22 प्रतिज्ञाओं पर आम सवाल

क्या हर बौद्ध धर्मांतरण करने वाले को ये लेनी पड़ती हैं? एक बौद्ध पत्र के मुताबिक भारत में ये धर्मांतरण की विधि का हिस्सा हैं (Budusarana, 2007)। कुछ सोर्स इन्हें अनिवार्य कहते हैं (Dhamma Bharat), पर मुझे किसी प्राथमिक सोर्स में ऐसा कोई नियम नहीं मिला, इसलिए इसे तथ्य की तरह नहीं लिखूँगा।

क्या कोई एक आधिकारिक पाठ है? मुझे कोई नहीं मिला। The Telegraph के मुताबिक पाठ अलग-अलग reproductions में बदलता है (The Telegraph, 2022)।

क्या ये पंचशील ही हैं? नहीं। त्रिशरण और पंचशील पहले आए, और 22 प्रतिज्ञाएँ समारोह में उनके बाद जोड़ी गईं (The Telegraph, 2022)।

धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस आज

ये दिन हर साल नागपुर की दीक्षाभूमि पर मनाया जाता है, जहाँ प्रतिज्ञाएँ दोहराई जाती हैं (Round Table India का धम्म चक्र प्रवर्तन दिवस वाला लेख)। वहाँ एक स्तंभ पर 22 शपथें खुदी हैं (The Telegraph, 2022)। इसी आंदोलन के एक और मशहूर क़दम के लिए हमारी पोस्ट बाबासाहेब ने मनुस्मृति क्यों जलाई पढ़।

निचोड़

14 अक्टूबर 1956 को नागपुर में त्रिशरण और पंचशील के बाद ये प्रतिज्ञाएँ दिलाई गईं (The Telegraph, 2022)। ये आस्था, कर्मकांड, समानता, बौद्ध मार्ग और अंतिम घोषणा को समेटती हैं (Round Table India)। इन्हें डॉ. अंबेडकर फ़ाउंडेशन के volume से कोट कर, क्योंकि सूचियों में शब्द अलग हैं।

बाबासाहेब ने तीन शब्द दिए: Educate. Agitate. Organize.

पढ़ना “Educate” है। Agitate और Organize तब शुरू होते हैं जब तू screenshot नहीं, सोर्स वाला पेज शेयर करता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

बाबासाहेब की 22 प्रतिज्ञाएँ क्या हैं?
ये 22 शपथें हैं जो बाबासाहेब ने 14 अक्टूबर 1956 को नागपुर में धर्मांतरण करने वालों को त्रिशरण और पंचशील के बाद दिलाईं (The Telegraph, 2022)।

ये प्रतिज्ञाएँ कब और कहाँ ली गईं?
नागपुर की दीक्षाभूमि पर 14 अक्टूबर 1956 को, और दूसरा समारोह 16 अक्टूबर 1956 को चंद्रपुर में हुआ (The Telegraph, 2022; Round Table India)।

बाबासाहेब ने बौद्ध धम्म क्यों चुना?
The Caravan के मुताबिक उन्होंने इसे इसकी भारतीय जड़ों, तर्कसंगत होने और सामाजिक समानता के प्रति प्रतिबद्धता की वजह से चुना (The Caravan)।

क्या 22 प्रतिज्ञाओं का कोई आधिकारिक पाठ है?
मुझे कोई एक आधिकारिक पाठ नहीं मिला। The Telegraph के मुताबिक पाठ अलग-अलग reproductions में बदलता है (The Telegraph, 2022)।

बाबासाहेब के संकलित लेखन में ये समारोह कहाँ पढ़ें?
BAWS Vol 17, Part III में, अध्याय “The Buddha Dhamma will be the saviour of the world” में (The Telegraph, 2022)।

स्रोत

  1. “Vows BJP and Arvind Kejriwal can’t gulp,” The Telegraph (Kolkata), 17 October 2022। BAWS Vol 17, Part III और पाठ के अंतर के लिए।
  2. “Ambedkar’s conversion to Buddhism,” The Caravan, Editor’s Pick।
  3. “22 Vows of Dr. Ambedkar” (प्रतिज्ञाओं की सूची), Round Table India।
  4. “Countering Hindu Morality,” धर्मांतरण का ब्योरा (नागपुर और चंद्रपुर, 14 और 16 अक्टूबर 1956), Round Table India।
  5. “Dhamma Chakra Pravartan Day: A symbol of Asserting our Identities,” Round Table India।
  6. “22 Vows of Ambedkar,” Dhamma Bharat।
  7. “Why are the Twenty-Two Vows Necessary for Neo-Buddhists?,” Janata Weekly, 22 October 2022।
  8. Budusarana (श्रीलंका), 10 October 2007, Budusarana।
  9. “Why did Dr Babasaheb Ambedkar publicly burn the Manu Smruti on Dec. 25, 1927?” (महाड़ की शपथ), SabrangIndia।
  10. B. R. Ambedkar, BAWS Vol 1 (p. 16 और editors’ introduction, p. xiv), marxists.org पर text copy।
  11. आगे पढ़ने के लिए (इस पोस्ट के लिए पढ़ा नहीं): BAWS Vol 17, Part III, Dr Ambedkar Foundation (The Telegraph के हवाले से)।

तेरी क्या राय है भाई? नीचे कमेंट कर और इस article को उन लोगों तक भेज जो आज भी इस झूठ पर यकीन करते हैं।

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