पेशवा कौन थे, और उनके राज में जाति का क्या हाल था? सच बोलूं तो इस बहस में एक डिटेल विवादित है, पर पूरा सिस्टम नहीं 👇
1968 के एक peer-reviewed paper (यानी विशेषज्ञों की जाँच से गुज़रा रिसर्च पेपर) के मुताबिक मराठा राज्य जाति के मामलों में सीधे शामिल था (Fukazawa, Hitotsubashi Journal of Economics, 1968)। उधर बाबासाहेब ने पेशवा-काल की सड़क वाली पाबंदियाँ खुद दर्ज की थीं (BAWS Vol 1, Annihilation of Caste)। तो क्या पक्का है, क्या कच्चा है, और दोनों को मिलाने से किसे फ़ायदा होता है? चल, देखते हैं।
पेशवा मराठों के मुख्य मंत्री का पद था (Britannica, “Peshwa”)। शिवाजी के पोते शाहू ने बालाजी विश्वनाथ भट को, जो चितपावन ब्राह्मण थे, इस पद पर बिठाया (Britannica, “Peshwa”)। फिर उनके बेटे बाजीराव प्रथम ने पद को वंश में पक्का कर लिया (Britannica, “Peshwa”)। मतलब पेशवा जाति की बात करें, तो 1700 के दशक के भट परिवार वाले पेशवा ब्राह्मण थे।
पेशवा राज पुणे से लगभग 1713 से 1818 तक चला (Encyclopedia of India, encyclopedia.com)। 1818 में बाजीराव द्वितीय ने अंग्रेज़ों पर हमला किया और अपना पद गँवा बैठे (Britannica, “Peshwa”)। यहाँ बात उस दौर की सरकारी नीति की है। आज के किसी समुदाय की नहीं।
दावा: “पेशवा राज में छुआछूत बढ़ा-चढ़ाकर बताई जाती है”
पेशवा कौन थे, इस पर सामने वाले का सबसे मज़बूत तर्क पहले सुन। X पर @peshwaspeaks नाम का एक पॉपुलर हैंडल है। उसकी पोस्ट के मुताबिक बाबासाहेब ने Kesari में दिए जवाब में खुद माना कि गले में मटके वाले दावे का कोई समकालीन लिखित सबूत नहीं है (@peshwaspeaks on X, 2025)। पोस्ट यह भी कहती है कि पेशवा-काल के millions दस्तावेज़ मौजूद हैं (@peshwaspeaks on X, 2025)। तर्क सीधा है: कागज़ चुप हैं, तो नियम था ही नहीं। ठीक है भाई, इसका टेस्ट कर लेते हैं।
पेशवा कौन थे? दावे की पोल यहाँ खुलती है
पहला, पोस्ट सिर्फ एक डिटेल पर वार करती है। बाबासाहेब ने कई नियम गिनाए थे। उन्होंने लिखा कि पेशवाओं के राज में सामने से हिंदू आ रहा हो, तो अछूत को सड़क पर चलने की इजाज़त नहीं थी (BAWS Vol 1, Annihilation of Caste)। साथ में गले या कलाई पर काला धागा, और पुणे में थूकने के लिए मिट्टी का मटका भी गिनाया (BAWS Vol 1, Annihilation of Caste)। तो मटका टेस्ट में फेल भी हो जाए, बाकी नियम उनकी गवाही के तौर पर रिकॉर्ड में रहते हैं।
दूसरा, राज्य का हाथ जाति में कागज़ पर दिखता है। Fukazawa ने 18वीं सदी के मराठा राज्य की पड़ताल की। उनका निष्कर्ष था कि राज्य जाति के मामलों के अंदर बैठा था, बाहर नहीं (Fukazawa, 1968)।
तीसरा, 1798 देख। बाजीराव द्वितीय के दरबार ने आठ तालुकों के अधिकारियों को लिखा कि ब्राह्मण परिवारों में दुल्हन की कीमत (bride-price) बंद करवाओ (O’Hanlon, Oxford ORA)। यह आदेश ब्राह्मण शादियों का है, छुआछूत का नहीं। फिर भी इससे दिखता है कि दरबार जाति के आचरण को सरकार का काम मानता था (O’Hanlon, Oxford ORA)।
चौथा, आदेश न मिलना मतलब नियम न होना नहीं है। इस लेख के लिए जो सोर्स देखे गए, उनमें मटके या झाड़ू का कोई पेशवा-आदेश नहीं मिला। इसलिए ये दोनों डिटेल विवादित कॉलम में रहती हैं। फिर भी कागज़ों की चुप्पी उतना साबित नहीं करती जितना पोस्ट कहती है, क्योंकि राज्य जाति पर फैसले भी देता था (Fukazawa, 1968)।
क्या विवादित है, क्या नहीं
पेशवा कौन थे से आगे बढ़कर अब सबूतों की छँटाई देख। पेशवा दलित इतिहास दो तरह के सबूतों पर टिका है: बाबासाहेब की गवाही और राज्य पर विद्वानों का शोध (BAWS Vol 1; Fukazawa, 1968)। विवादित का मतलब झूठा नहीं है। मतलब बस इतना कि कागज़ी सबूत अभी नहीं मिला।
दावा
स्थिति
स्रोत
पेशवा राज्य जाति के मामलों में शामिल था
मज़बूत सबूत
Fukazawa, 1968; O’Hanlon, Oxford ORA
सड़क पर रोक और काला धागा
बाबासाहेब की गवाही; देखे गए सोर्स में कोई पेशवा-आदेश नहीं मिला
BAWS Vol 1, Annihilation of Caste
कमर में झाड़ू
विवादित
BAWS Vol 1, Annihilation of Caste
गले में थूकने का मटका
विवादित, सबसे कमज़ोर डिटेल
BAWS Vol 1, Annihilation of Caste
पेशवा छुआछूत: रिकॉर्ड क्या कहता है
बाबासाहेब का पेशवा जाति-नियमों वाला ब्योरा Annihilation of Caste में है, जो उन्होंने 1936 में लिखा (BAWS Vol 1, Annihilation of Caste)। उसी किताब में दर्ज है कि ब्राह्मणों ने पेशवा सत्ता का इस्तेमाल करके सोनारों को ब्राह्मण जैसे रीति-रिवाज अपनाने से रोका (BAWS Vol 1, Annihilation of Caste)। यानी राज्य फिर जाति के ऊँच-नीच के पक्ष में खड़ा दिखता है।
Two-column illustration comparing the Peshwa caste myth with the documented record | पेशवा कौन थे? दावे और ऐतिहासिक रिकॉर्ड की तुलना दिखाता दो कॉलम वाला फ्लैट इलस्ट्रेशन
बाद में संविधान ने इस प्रथा पर सीधी रोक लगा दी। अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता को खत्म करता है और किसी भी रूप में उसके पालन को मना करता है (Constitution of India, Article 17)। यह 1950 में कानून बना (Constitution of India, Article 17)।
पेशवा जाति वाला मिथ बार-बार क्यों लौटता है
मिथ का तरीका सीधा है: बहस को छोटा कर दो। आलोचक सबसे कमज़ोर डिटेल, यानी मटका, उठाते हैं और उसे पूरा रिकॉर्ड बना देते हैं (@peshwaspeaks on X, 2025)। फिर सड़क वाले नियम और राज्य की भूमिका भी उसी के साथ उड़ा दी जाती है।
पर कभी-कभी हमारी तरफ से भी चूक होती है। 2023 की एक वायरल पोस्ट मटका और झाड़ू वाले नियम सीधे तथ्य की तरह लिखती है, और पोस्ट के टेक्स्ट में कोई पेज नंबर नहीं है (The Dalit Voice on X, 2023)। सुन, screenshot नहीं, receipts जीतते हैं। इलाज ज़ोर से चिल्लाना नहीं है। इलाज है सोर्स वाले पेज publish करना, जो Google और AI tools को मिल जाएँ। (इसी के लिए Ambedkarite Educational Program अंबेडकराइट्स को तैयार करता है: Blogging & SEO, Google AI और Prompt Engineering।)
निचोड़
अगर कोई पूछे कि पेशवा कौन थे और उनके राज में जाति का क्या हाल था, तो जवाब यही है। पेशवा जाति के नियम सोशल मीडिया की खोज नहीं हैं। 1700 के दशक में राज्य जाति पर पहरा देता था, और बाबासाहेब ने सड़क वाले नियम दर्ज किए (Fukazawa, 1968; BAWS Vol 1, Annihilation of Caste)। मटके और झाड़ू को बेहतर सबूत चाहिए। बस उतना ही बोल, जितना सोर्स कहते हैं।
बाबासाहेब ने तीन शब्द दिए: Educate. Agitate. Organize.
ये blog पढ़ना “Educate” है। पर Agitate और Organize कहाँ?
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पेशवा कौन थे और उनकी जाति क्या थी? पेशवा मराठों के मुख्य मंत्री का पद था। 1700 के दशक के भट परिवार वाले पेशवा चितपावन ब्राह्मण थे, और पहले बालाजी विश्वनाथ भट थे (Britannica, “Peshwa”)।
क्या पेशवा राज में छुआछूत थी? बाबासाहेब ने पेशवाओं के राज में सड़क पर रोक और काले धागे का नियम दर्ज किया (BAWS Vol 1, Annihilation of Caste)। विद्वानों के मुताबिक मराठा राज्य जाति के मामलों में शामिल था (Fukazawa, 1968)। मटके और झाड़ू वाली डिटेल विवादित हैं।
क्या मटके और झाड़ू का कोई लिखित पेशवा-आदेश मिला है? इस लेख के लिए देखे गए सोर्स में नहीं मिला। मुख्य रिकॉर्ड बाबासाहेब का बयान है, इसलिए ये दो डिटेल विवादित रहती हैं (BAWS Vol 1, Annihilation of Caste)।
पेशवा राज कब खत्म हुआ? लगभग 1713 से 1818 तक चला (Encyclopedia of India, encyclopedia.com)। 1818 में बाजीराव द्वितीय ने अंग्रेज़ों पर हमला किया और पद गँवाया (Britannica, “Peshwa”)।
क्या भारत में छुआछूत गैरकानूनी है? हाँ। अनुच्छेद 17 ने इसे हर रूप में खत्म किया (Constitution of India, Article 17)।